व्याकरण

व्याकरण
व्याकरण /vyākaraṇa/ n.
1) различие
2) анализ
3) грамматика
4) назв. одной из Веданг; см. वेदाङ्ग




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महाविक्रम, शाक्त, फुत्कार, वाट्य, निरागस्, सुखाभ्युदयिक, छदस्, अयुत, तिल, सामाजिक, सारङ्गी, सर, नमस्कार, °धारक, भागार्थिन्, कुशलिन्, मर्ष्, आसिच्, तावत्, सुखसुप्ति, संकीर्तन, उपशम, वीरशया, ध्रुवि, °लापिन्, एकरूपता, लोग, परिस्खल्, वडभि, विघात, सर्वतो°, शालापति, प्रावर्षिन्, देवनामन्, कुहक, रजनिचर, परिचित, पीनस, जयेश्वर, सुयज्ञ, गृहिणी, कुठार, अतिद्रु, अपम, कुलपति, शुक, वल्कल, अग्न्याधेय, सुमित, सध्री, आश्लिष्, उत्कर्ष, दारपरिग्रह, भावयितर्, हाटकमय, धनलोभ, नभश्चरी, संभूय, नक्त, सराजन्, अलका, प्रतोली, छन्दन, सेविन्, जनवाद, वनुस्, नखच्छेदन, निर्लोभ, समवसर्, दैवहतक, बाहुल्य, निस्त्रिंश, मध्यमपद, संभा, स्तोक्य, पौरंदर, दावाग्नि, नैःश्रेयस, याज्ञिक्य, उद्गार, आतर्पय्, शिलोञ्छन, दशसाहस्र, असत्य, जीवितान्तक, शैशव, वस्, स्तनमध्य, मुखगत, शुच्, समयोचित, रुशत्पशु, नैदान, निर्धन, वचस्यु, विवेक, कन्या, सक्मन्, प्रतिपण्य, सश्रद्ध, प्रपलायन, °रक्षिन्, चपलिता, भूमिभृत्, हिममयूख, कीर्ण, कूज, षष्ठ, अनुसर्, तृप्ति, आवश्यकता, अभिरम्, हवनश्रुत्, स्ति, दिङ्नाग, अतिजीव्, परोक्षा, अपया, शुचित्व, वर्ष्या, माघ, उष्णग, किराट, दीन, विमर्द्, भविष्यत्त्व, आकारता, परिश्रान्त, दिदृक्ष्, देवयजन, विद्वेषिन्, द्व्यर्ध, अङ्गुलीय, निस्राव, शुनी, अनागत, प्रथीयंस्, समान्त, महिलारोप्य, एकषष्टि, स्नुस्, जनुस्, पौच्छ, संतार, संसर्पिन्, वक्षणा, अजन, अष्टपाद, अभ्यवहरण, विश्वासाह, सप्ताश्व, सक्षीर, रावन्, तीक्ष्णहृदय, परिवित्ति, विनिर्गम्, मेद्य, चर्मज, कवित्व, कोष्ण, दिविस्पृशन्त्, अचिरप्रभा, सूतु, ताम्, आदर्, तुविष्मन्त्, यायिन्, कृतक्रिय, अजीत, हेमन्, द्वंद्विन्, पृथिवी, तट, चित्रग्रीव, मधूत्सव, भास, जघ्नि, पुरुक्षु, शासितर्, परिक्षाम, अरिप्र, वयस्यक, जानकीवल्लभ, शैक्यायस, चेष्टन, मौक्तिकावलि, तैल, अवछन्न, प्रह्लाद्, वीध्र, अध्वन्, हलगोलक, अयास्य, राजकन्यका, दिनमणि, निर्मर्याद, निष्कुट, स्वाशु, विशूल, वृश्चिक, मधूलक, सुभाषित, रि, गान्धर्व, प्रमातर, दम्भोलिपातय, परभृत
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