हिरिश्मश्रु

हिरिश्मश्रु
हिरिश्मश्रु /hiri-śmaśru/ m. nom. pr. Златобородый — эпитет Агни; см. अग्नि




Случайная выборка слов

प्रत्याशम्, असहाय, संहस्, पर्यालोचन, आनृण्य, दक्षिणा, सर्वहुत, प्राग्जात, हय-मेध, भौम, व्यध्, त्रिपुरहर, श्वस्तन, चतुर्भाग, पुत्रवन्त्, एवंप्राय, हस्तादान, स्थूलप्रपञ्च, सहचार, तर्पणी, घात, पिण्डरक, तमोभूत, दुष्प्राप, उदयन, दब्ध, पटीर, हाहा, प्रतिमा, क्लम्, शुचि, प्रगर्, शन्तिव, , रथोद्धत, मदिर, गकार, मार्जालीय, उत्पाटन, वह्, विनिवर्त्, पयोद, मृगाधिप, मूढचेतन, दूतिका, अवस्तु, प्रकीर्णक, रवण, विषाद, कोष्ण, भृतक, तूष्णीक, संरा, विभावसु, उरण, प्रच्छादन, भ्राजि, क्षञ्ज्, विदर्शय्, विजृम्भित, निर्ग, असवर्ण, त्रिदशच्रेष्ठ, नहुस्, तटिनी, श्रद्धालु, पच्छस्, विदार, सापेक्ष, प्रत्यभिज्ञा, सीमावाद, चर्चरी, अमाय, मित्रकृत्य, शैक्ष, परिलुठ्, मायावती, पर्वतश्रेष्ठ, तकार, प्रतिभी, ईति, प्रवाहण, क्षिप्, हेतुक, निर्जीवकरण, सोमपायिन्, वृद्धवयस्, वृषमन्यु, नौका, पश्, °सज्जन, सामग्री, आशङ्क्, पापीय, नवीय, निर्व्यूढ, प्रतिबिम्ब, कार्याधिकारिन्, वाश्रा, ब्रह्मपुत्र, तात, मृग, उल्लिख्, निज, तोयदात्यय, दीप्तकिरण, पवित्रारोहण, डाल, प्रश्नकथा, चतुर्विंश, आर्यवृत्त, सीमन्, आविष्कार, दुरापन, ज्योतिःशास्त्र, महाकाय, आलभ्, हृच्छय, स्मील्, बृहत्°, कङ्कत, सचक्षुस्, आस, प्रवचन, आरब्ध, त्रिमात्र, मुखशशिन्, बलाधिक, सूर्यबिम्ब, सर्वज्ञत्व, अधिप, सर्वतोमुख, विवेकवन्त्, अभियोजय्, अस्मदीय, नृति, आदितस्, दृषदोलूखल, प्रियबन्धु, प्राभवत्य, अनुपराभू, प्रत्यवाय, जरितर्, हलहला, शूरण, मौढ्य, ओम्, उपपत्ति, निःसङ्गत्व, क्षीणत्व, °शर्धिन्, अधमधी, मज्जा, आमिश्ल, अनवद्य, आमन्त्रण, कमलाक्ष, शाङ्खायन, आरस्, कांस्य, बाल, कक्, कण्ठाश्लेष, श्रद्दधानता, तूणव, वस्, चक्रि, स्थलज, सौगन्धिक, शवकर्मन्, परिपत्, दल, निर्मातर्, सिंहद्वार्, ऋषभ, विचि, विशुद्धात्मन्, अपिधान, सपद्म, धारयित्री, निरूढ, रक्तमोक्ष, गभीर, प्रान्, चेतिष्ठ, मर्द्, प्राथम्य, नरोत्तम, महानस, मूढता, गङ्गा, समादिश्, सतत, दारुणता, संप्रणेतर्, त्रिविक्रम, सातिरेक, भर्तृहरि, होम्य, शन्त्व, पत्त्रारुढ, निर्ग्रन्थन, प्रज्ञामात्रा, मेध्यत्व, स्थविमन्, वलिन, भोस्
переводы с персидского языка, литовский словарь




    Яндекс.Метрика
    словарь санскрита 2009-2012 ©LingvoKit