संभाष्

संभाष्
संभाष् /saṁbhāṣ/ (формы см. भाष् )
1) разговаривать, беседовать с (Instr. с [drone1]सह[/drone1])
2) приветствовать




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दोषस्, निष्कलङ्क, शिखिन्, अतिभूरि0, अनुवाक, संहर्, युयुत्सा, अभिपट्, भद्रवन्त्, हंसावली, अपह्नव, पोतप्लव, सहस्रचक्षुस्, प्रक्रय, विशोधन, संवनय्, दुरवगाह, त्रि, तदून, द्वाररक्षिन्, मनावी, पश्यति, द्विचत्वारिंशत्, वव्रि, निर्गृह, पुंसवन, पात, आश्विन, प्रशस्, सलिलनिधि, पुलाक, राजप्रिया, सलिलज, श्रद्धालु, साग्र, नीलकण्ठ, अगद, अवान्, तपिष्ठ, निरामिन्, वेत्तर्, सर्वत्रग, नाटिका, कीट, ऊर्ध्वपुण्ड्र, सित, माहिन, ग्लानि, नीर, तण्डुल, उष्ट्र, °नालक, यूथप, यन्त्रय, ब्रह्मसत्त्र, मध्यस्थिता, अनुज, जिन, अस्थान, स्तनयित्नु, निर्झरण, संधुक्षण, द्विक, मथः, महोत्सव, अन्यता, दीप्ति, हयशीर्ष, प्रजापालन, निद्रालस्य, प्रतिमल्ल, कुचेल, निवर्हण, निर्जीवकरण, अनुदिश्, सद्योजाता, नमन, चाप, त्रैकाल्यदर्शिन्, ज्रि, विगल्, प्रतिलभ्, शष्कुलि, स्रोतस्य, किंपुरुष, वीतजीवित, संपरिश्रि, स्वतन्त्र, मोटक, महामेघ, प्रयुक्ति, सहधर्म, प्रमय, अग्निशरण, महाग्राम, संप्रोक्षनी, मदन, चक्षुष्प्रीति, कामरूपिन्, नप्ती, सुकण्ठ, चिन्त्य, प्रणाश, वै, पालि, व्यतिहार, ऋषिकुमार, तिर्यगायत, दीप्र, निरारम्भ, विदेवन, प्रत्यवमर्श, आशित, विजिति, परोऽक्ष, प्रतिहार्द्, असितपीतक, दुरवबोध, शीर्षण्य, सर्व्, दशविध, अभ्यागमन, वसुधापति, बलद, प्रालम्ब, हस्तग्राह, त्यक्त्वा, शुभ्र, साभ्र, वैराग्यशतक, पतंगर, दूरेभा, अंशभूत, परिचर्, अनभ्र, यमराजन्, नियुत्, जागरक, सस्यरक्षक, शकल, कल्पतरु, पद्मराग, वाग्मित्व, याच्ञा, निकर, दानवीर, आहर, गगनगति, नृतू, घर्, कुशूल, लघुचित्त, विघ्नवन्त्, म्ला, न्यायविद्या, भूशय, प्रबुध्, पिनाक, वाण, अनुबन्धिन्, निःसारण, रक्तत्व, शिरोधर, विशल्य, वल्कल, अश्वमेध, उदक्, मध्यता, नादिन्, यूथ, कल्याणलक्षण, अश्वघोष, परिचारिका, वार्य, वार, शरण्य, प्रयन्तर्, लुड्, संतापन, हविष्मन्त्, अपकार, देवरूपिन्, प्रतिकाश, पि°, , कृशनावन्त्, , अभिवस्, समित, नीकार, ध्रुवगति, विष्फुलिङ्ग, ततस्, निदानस्थान, अतीर्थ, °साक्षिक, नामचौर, अद्य, कलाप, वर्गशस्, कार्याअर्थिन्, दंष्ट्रिन्, जिह्मशी, धारिन्, तृणजलायुका, द्विरात्र, प्रमणस्
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