क्रमेल(क)

क्रमेल(क)
क्रमेल(क) /kramela(ka)/ m. верблюд




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अभिद्रुह्, नाकु, नरदेव, वृषान्न, पौण्ड्र, सांख्य, शातोदर, वैडूर्य, गव्यन्त्, ऋतुसंहार, अवचन, शुभाय, धीरभाव, श्रुतितस्, विष्कम्भ, मुण्डिन्, समीपग, अवधा, वीत, विभञ्ज्, मुर्मुर, समरण, अरुन्धती, तद्युत, यतम, जवन, पूर्वराग, परिशेष, स्पर्शत्व, गदा, सानु, साधर्म्य, उशी, प्रतिपादन, क्रियायोग, प्रासाद, शुभंयावन्त्, व्यपनुद्, जन-राज्, कवोष्ण, परिपन्थिन्, श्वभ्र, अपवध्, पूर्वक, संरोपण, विना, तूष्णीम्, प्रब्रू, गीति, विफलत्व, आजि, पाटल, व्यवस्थित, चेटिका, अञ्चल, उपारण, विनिर्जि, स्रिव्, प्रावृषेण्य, आकारावन्त्, महामति, समरमूर्धन्, द्वाचत्वारिंशत्, आविद्, कति, प्रदीर्घ, शिलाचय, शालीन, चित्रग, निशुम्भ, परिगम्, वीरभद्र, भूतिकृत्, नाशक, मन्त्रवाद, दुरूह, मिश्रण, वृष्टिवनि, वृष्टिसनि, दुःशीलता, न्रधीश, अलोभ, विनिद्र, दुवस्यु, सिकता, कर्करी, कलानिधि, तर्जना, संरुद्ध, किङ्किणी, ओषधि, शक्मन्, आनुपूर्व्य, कूर्म, धापय्, बहुश्रुत, गुञ्ज, प्रसत्ति, बर्हिःष्ठ, तपोयुक्त, उक्षण, याच्य, सकर्मक, सहस्रशीर्ष, नीरद, विरहिन्, मूषी, अंह्रि, मल्ली, वत, अप्रसन्न, अमरराज, नाव्य, तथाविध, दक्ष्, मागधी, बस्ति, तिर्यञ्च्, पार्श्वगमन, भक्ष्य, षोडशधा, अनुपलम्भ, ब्रह्मविद्या, पुरंधि, लोकत्रयी, सगद्गदगिर्, भर्तृव्रत, नीलिमन्, रोमहर्ष, व्यसन, निर्वा, निपातन, शुभस्पति, रुह्, अक्षय्य, अवस्थिति, द्यूतशाला, दाधृषि, परे, विवयन, नेत्रोत्सव, अनुवादिन्, वन्य, अन्यार्थ, मृगेन्द्रता, जलाषभेषज, अनुशास्ति, प्रतिवर्ण, बम्भारव, शंसा, व्याख्या, विकल्प, गुध्, पाण्डिमन, सर्वविद्, अनूक, ध्रुवतारा, पलिक, नीशार, निह्नुति, पुष्, अपधम्, धैर्यता, प्रविद्, , षष्ठ, वरारोह, विभ्रंशिन्, उरुगाय, पुच्छाग्र, परिष्कार, निरौषध, प्रतिरुध्, वीर, चतुरश्र, नैःस्नेह्य, राजसिंह, मिल्, जारिणी, बिम्बित, नैकशस्, तपोवन्त्, रङ्ग, हरिणी, तान्, अतिवर्षण, हैमवत, घुणाक्षर, श्रुति, प्रदर्शय्, शीघ्रपायिन्, जरण्या, मदनावस्थ, तादृक्ष, सानाथ्य, प्राधनिक, प्राक्तन, नगापगा, ल्+_, शुक्रिया, त्रिदशालय, वत्सल, पीठ, प्रतिबोद्धय्, समानजन, परिलुड्, मांसन्वन्त्, चरितव्रत




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