शलातुर

शलातुर
शलातुर /śalātura/ (без рода) назв. места, где родился Панина; см. पाणिनी




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°ज, वान्ति, व्योमचर, भौमिक, देवतात्, अप्रकेत, श्यामी भू, श्वेतपुष्प, सातिरेक, हविर्°, अवस्, विष्टप, त्रिशीर्षन्, प्रतिवर्ष°, अनुलभ्, मन्थितर्, जल्प्, श्मश्रुधर, द्रौपदि, गुह्, शाट, दैविक, स्फुर्च्छ्, स्वयंमृत, वैह्वल्य, संनिविश्, गतसार, दासता, बाहुमूल, स्थास्नु, वाव, अरक्षित, सरुज्, लङ्घ्, उपधा, महेष्वास, वंशकृत्य, पञ्चतय, जाघनी, धन्यता, उत्सादय्, व्यपनय, प्रदिश्, द्यावा-पृत्हिवी, दूरेदृश्, देशिक, अनेद्य, गाथा, सहोदा, प्रकृष्ट, मामिका, प्रतीघात, सिध्र, लक्ष्य, जेष्ठवृत्ति, प्राण्यङ्ग, नू, अनुवस्, निर्व्याजता, हिंसीर, जाम्बूनदमय, पर्यावर्त, पुरूची, सेतर्, दया, महद्भय, आहर, निरीक्ष्, अभिप्रेत, भूतिकृत्, वज्रपात, नट्, वामा, वीक्षा, उद्यमभृत्, नाकु, सुकवि, असत्पुत्र, अनद्यतन, धर्मिन्, चञ्चललोचन, रूपवन्त्, दक्षिणापथ, अप्राज्ञ, वमथु, सशोक, मन्दार, इन्द्रवंशा, पङ्गुल, संह्राद, संध्याभ्र, छुबुक, नाश, वज्रिन्, अतिप्रवृद्ध, सना, चिताग्नि, तायु, सैकतिन्, प्रतिच्छन्द, मसि, रामणीयक, निर्विहंग, माविलम्बम्, महामख, अनेन, सदसस्पति, नामपारायण, सकम्प, पल्ली, ध्वंस्, कदर्थ, अर्धभक्षित, मृष्ट, पीतकोश, भैक्षचरण, वस्त्राञ्चल, वह्निमय, ब्राह्मणता, रामायण, परीक्ष्य, उपहा, द्व्यणुक, प्रसवीतर्, कलिकाता, तिरस्करिणी, समाव्यध्, व्रणिल, त्रिककुभ्, जागरक, अवनति, निष्कृप, अत्युदात्त, घृणीवन्त्, अतितेजस्, व्युद्, पर्याण, छल, साशङ्क, अवलेप, दुर्विभावन, सुखोदय, संभा, पृथुता, अश्वा, एकादशम, मन्मथलेख, शताङ्ग, निश्चल, अत्र, कापथ, द्वेष्य, स्पर्ह्, प्रामादिक, ऊम, स°, उपताप, मुद्, मृतक, सौगत, स्पर्शत्व, विपाक, आत्म-लाभ, चतुर्विंशत्, आत्मनाद्वितीय, अचिन्तित, सुनिर्वृत, जुटिका, संरुज्, हूंकृति, हेतुविद्या, एकपद, अङ्गुलिमुद्रा, अध्रि, स्मय, परी, भङ्गि, पणन, सभागत, हारयष्टि, प्रमीय, उन्मर्ज्, उपसेचन, त्रिषत्य, हरिक, क्रुध्, संराग, धनू, दशबन्ध, जनित्री, जीर्णता, प्रक्षेप, उत्साहयोग, सर्पदंष्ट्रा, वारिपथ, धीमन्त्, ऐश्वर, भूमीरुह्, °पथ, सर्पवेद, श्मश्रुधारिन्, विलम्बित, प्रस्तुत, लेश्य, विदर्शित, मुक्ताफल, स्वाहा
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