परिसर्प्

परिसर्प्
परिसर्प् /parisarp/ (формы см. सर्प् )
1) скользить вокруг чего-л.
2) ходить вокруг чего-л., кого-л. (Acc. )

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नटक, सवितर्, निन्दक, दुर्णश, भुक्तमात्र, शङ्का, सत्य, दुरुक्ति, निर्झर, उपसेचन, °विद्योतिन्, नैःस्नेह्य, संदेश, आपर्, चतुःशालक, उपाय, शर्यणावन्त्, विलुण्ठन, तिर्यग्जन, ध्राज्, आशु, दान्त, सकरुण, श्राव्य, अर्ष्, सामन्, पक्षगम, आगम्, धायु, दीर्घायु, आतुर, विचय, उपास्था, प्रेक्षा, बीभत्सु, पुत्रिका, रिक्थभागिन्, शितिमांस, °पर्, वियोगिता, कल्पक, महान्त, प्रदीप्त, अभिरु, सादर, विज्ञापित, श्वभक्ष, भ्रामिर, सृष्टि, अनाष्ट्र, रोचस्, ब्राह्मणायन, सर्पविद्या, उपोषित, पृथिवीरुह, अधुना, अपद, नृपगृह, अनुशय, गृहद्वार, मूढमति, संध्यासमय, निर्यातन, निर्वाहक, महाकपि, परादा, एकविध, अरण्यानी, ज्रि, अनुमन्, प्रमाय, पर्च्, नाटितक, कृष्णवाल, अप्रज, स्नानिन्, अतिपद्, निह्नु, ब्रह्मवेद, मास्, धा, तीर, निष्पाप, जीवन्मुक्त, चामीकर, बुद्धुद, वालव्यजन, विरक्ति, नवमेघकाल, वितन्, प्रणत, पिच्छल, सरित्पति, अरति, दास्वन्त्, यवमन्त्, शाक, कुञ्चिका, पृथ्वीतल, कोशल, °हिंसक, शबल, भस्मभूत, अव्यय, मातादुहितर्, क्ष्वेल्, समाधि, अध्ययन, पापबुद्धि, अनुपसर्ग, व्यवधान, पञ्चगव्य, दुःशिष्य, वाज, अनुपभोग्य, कौमारचारिन्, धर्मेन्द्र, नामधा, त्रिगुण, प्रपालन, वरद, सित, °धान्यक, मनाक्, पराश्रित, चाट, प्रदीपक, चैतन्य, दन्त, आत्मजा, तुविष्ठम, निर्वाह, वर्णक, प्रश्नय, कण्डू, अवधान, सितमनस्, स्तोतव्य, जिज्ञासा, व्रीहियव, अवितथ, सुसदृश, मेष, आधी, रतिरस, स्वर्गमन, प्रक्षालन, कुल्य, महायुग, लोकाचार, मुमूर्षा, पर्यय, बन्धय्, चर्मन्, परिमुह्, क्षौरकरण, अस्मभ्यम्, शान्ति, उद्रिन्, गोक्षीर, विधम्, उद्वत्, मधुरस, वीरुध, परिकल्पन, नेक्षण, वाट्य, संफुल्ल, कासिका, अदाक्षिण्य, अनुवस्, निःसंज्ञ, हि, नार्यङ्ग, परुस्, अदृश्य, वरुणालय, त्रैधम्, °वेशिन्, प्रमृग्य, हस्तबिम्ब, ऊहन, शचि, भक्ति, न्युब्ज, संग्रहणी, मौग्ध्य, आप्य, वस्, घुट्, द्वार्य, रोम°, पुंसवन, उद्रङ्क, अवमानन, संसेवा, याव, संहर्तर्, चट्, बलपति, शोभक, बुद्धिमोह, विमथ्, ऋबीस, पत्तन, भगदेवत, धारण







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