त्रयस्सप्तति

त्रयस्सप्तति
त्रयस्सप्तति /trayassaptati/ семьдесят три




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गर्ज्, उपासन, अन्तस्ताप, अम्लान, बम्भराली, दृक्छत्त्र, स्फीत, छेदनीय, समावेश, निष्पदय्, संदुह्, दौर्हृद, आविद्, अब्ज, तीरज, अभिभू, त्रिगण, निर्भय, ऋण, चेतु, व्यासङ्ग, हेतुवाद, प्रतिनर्द्, महाभोग, नरेन्द्रत्व, गृध्नुता, प्रज्वल्, विनश्वरता, इन्द्र, अनुव्रत, आतर्, स्वर्, विलोडन, ग्लह, मृगेन्द्रता, शलाटु, मर्ड्, श्वेतच्छात्रिन्, शितता, पाक-दूर्वा, सागरगामिन्, अष्टात्रिंशत्, नैरुज्य, धूमक, धारा, काम्य, बान्धक, पुद्गल, द्वात्रिंशत्, राजवल्लभ, गल्, प्रस्तातपङ्क्ति, मीनरिपु, निष्क्रयण, निरालोक, अभित्यक्त, त्रिपद्, अपर्यन्त, चोर, वध्रि, ऊधर्, उदश्रु, आविद्, अनिष्ट, यहू, खल्य, व्यत्यय, प्रायुध्, भर्त्सित, परपुरंजय, दुश्चारित्र, उपरति, दुर्हार्द्, गुणग्राम, विवेकित्व, विन्ध्यवन, प्रिय, संप्रसू, अमुया, सुमहामनस्, जयाशिस्, संप्रदिश्, विपणिगत, कृपाण, शतधा, परोपकर, अहर्निश, छुरिका, द्वेषस्थ, सरस्वती, सुगन्ध, तरुणिमन्, प्राशितव्य, याम, बहुभोजक, अपधाव्, काव्यकर्तर्, चतुर्दशम, निर्विश्, संधेय, गरुत्, विक्रमचरित, परिदेवना, द्वादश, आचेष्ट्, चित्तभ्रम, भट्टि, प्रतिमार्ग, पातोत्पात, व्याम, प्रतीशीन, गोमेध, तन्तुवाय, वाग्यमन, निमद, संस्थान, पुत्राचार्य, जालपाद, शरन्मेघ, कुट्टिनी, मुख्यार्थ, जन्, शैक्य, रात्रिजागर, बाधिर्य, अर्भ, चन्द्ररेखा, ताम्रता, अभ्युपपद्, दिवसमुख, अनूत्थित, दशकण्ठ, विजृम्भन, मृडन, उपसृष्ट, अनाविद्ध, प्राग्र्य, उत्तम्भय्, अनुप्रेषय्, विनय, अङ्क्ते, परिज्ञान, प्राकरणिक, दिग्भाग, अतिसंक्रुद्ध, पद्मनाभ, शुभमङ्गल, शास्, उपस्त्हाय्, वल्लकी, रविमण्डल, आदिन्, श्रोणिमन्त्, अर्थ, प्रत्यपकार, रुक्मवक्षस्, सूर, ऋग्मिन्, निरमित्र, रिङ्ग्, शतद, सश्लाघम्, प्रार्थिन्, अतल, मागध, विवाचन, पतर, दीर्घायुस्, सप्तच्छद, स्रुति, हाल, धूम्रवर्ण, आज्ञाकरत्व, उक्षण, कण्टक, अलि, एकरस, व्यवहारपद, नभःस्थित, कण्डु, क्रीदुमन्त्, चिकीर्षित, सुरसुत, हास्याभाव, वितत्व, विश्वतूर्ति, निस्यन्द्, तोयवन्त्, बाधितर्, रथाङ्ग, सुप्रसाद, षट्कर्ण, यजन, जनदेव, उपनदय्, अर्णव, परित्रातर्, पार्वण, दुरवाप, यवन्, निर्विन्ध्या, लोहमय, कुचर, प्रासाद, अधिराज, निदह्, शादन
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