सन्मन्त्र

सन्मन्त्र
सन्मन्त्र /sanmantra/ (/sat + mantra/) m. хорошее изречение




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हव्यवाह्, यशो°, दरद, उत्तभित, श्वित्यञ्च्, नयन, भीमनाद, तिरोजनपद, सुप्त, हर्षवर्धन, लब्धि, पुरी, देवप्रिय, अकरण, हृदयच्छिद्, समधिक, तित्तिरि, वृद्धसेवा, प्रस्वापय्, री, प्रदीप्, नरराज्य, शुक्रिया, त्रिशङ्कु, विखेद, शशाङ्क, सददि, वरिष्ठ, यज्ञवाहन, सवनकर्मन्, गोमत्, परिवस्, निःशेष, पिशुनवचन, नन्दय्, अभिसिच्, स्ति, इन्द्रता, विनिवर्त्, परितर्कण, द्रुतविलम्बित, अपिमर्ष्, नक्त, समाश्रि, वृकोदर, चतुश्चत्वारिंश, ब्रह्मचारिन्, तपीयंस्, संबाध, गृह, अष्टाविंशति, फलिन्, द्विपिनी, सौहृद, पञ्चरात्र, एकत्र, दृढता, प्रदोषागम, पिण्ड, तर्, सप्रज, कुमारीभाग, तपस्विन्, नृषदन, शुभाशुभ, राधा, ऊर्जस्वल, अनतिदग्ध, विशातन, निर्दुःख, षडंश, अक्षर, भैक्ष, निश्छिद्र, सुखोदर्क, वृत्, द्रवितर्, चलचित्त, महाभाग्य, उपाहर्, चक्ष्, दुर्जय, विव्रश्च्, आराधय्, देहेश्वर, शालिभवन, नाकलोक, मूर, भूति, परिस्यन्द, मिहिर, ज्यैष्ठ, विलेपिन्, पृथग्विध, उद्धन्, पूर्णता, भुजंगम, अंशुमन्त्, स्थण्डिल, धनुर्मध्य, रत्नवन्त्, भोजक, अभ्यास्, आस्कन्दन, सेवन, प्रतिप्रश्न, पृथुशिरस्, ऐकार, कालज्ञ, समुज्ज्रम्भ्, पाणिग्रह, सिन्दुवार, पृथिवी, विदिश्, समीपदेश, धनुष्मन्त्, रुग्ण, विरस, संवेद, सूचन, ह्रस्वकर्ण, सोद्वेग, विद्रुव, ईड्, पोत्रीय, हेतु, श्वेत, विषकुम्भ, त्वरित, सोमसुत्वन्, सहस्रसनि, त्रिरात्र, दिप्सु, उर्वीभुज्, साह्य, अदण्ड्य, क्षमत्व, द्वैध, शणसूत्र, तुरग, स्रग्विन्, अधःशय्या, मुख्यार्थ, सुलक्षण, अधःशायिन्, हंसबीज, अभय, छन्दस्य, रय, , रघुयन्त्, पूर्वत्व, द्विविधा, पुरुशुश्रूषा, निराकार, सिंहासन, दुह्, तात, अपरज्, हिम्य, अशोक, असत्पुत्र, उन्नद्, प्रतिशत्रु, प्रदाह, कनकरस, तान्, पूर्वाद्य, न्यायवादिन्, आसक्त, विश्वकृष्टि, प्रत्याख्यान, स्कम्भन, क्षेमयोग, समुद्धू, दिङ्मण्डल, षष्टिवर्षिन्, कुवलयनयना, क्षेपणी, निगड, आचक्ष्, साहस्रवन्त्, सुबल, पृथगालय, ककुभ्, आपीत, गणिन्, कालप्राप्त, कश्मला, अतिवद्, पश्च, वेश, रक्त, भाव, पराञ्च्, , स्फिगी, शमयितर्, धर्मरूचि, मुखवर्ण, तोकिनी, तिरोजनम्, प्ररुह्, कोलाहल, सीमाधिप, अदन्त्य, भ्रमि




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