लक्ष्याभिहरण

लक्ष्याभिहरण
लक्ष्याभिहरण /lakṣyābhiharaṇa/ (/lakṣya + abhiharaṇa/) n. выигрывание приза




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सोमप, समाहर, वृन्द, पात्रस्थ, आनी, भीतिमन्त्, सवासिन्, व्युत्पद्, अमिवा, चन्द्रवन्त्, दुष्परिहन्तु, ष्ठीवन, सुरसरित्, सायंकालिक, पूर्वज, दुर्जीव, चत्वारिंशत्, शब्दब्रह्मन्, आवर्तन, विनयन, उच्चर्, क्षिप्रेषु, कौरवेय, , लोकहित, मृगारी, मत्कुण, रण, गूढज, दृषदुपल, परिपाटि, इत्वर, अधिकार, परिक्रम्, ब्रह्मपुराण, स्वस्ति, द्वादश, स्वाद, वसूया, खरोष्ठी, °रज्जुक, ईष्, अनेक, सस्र, तोयधर, उत्कृष्ट, महाज, लघिमन्, साम्य, अमूल, धमन, उत्तरकाल, हव्यभुज्, दिवित्मन्त्, प्रस्तव, असत्, विस्वन्, जलाधार, चञ्चुत्व, °शरीरक, प्रतिरूपक, समानत्व, जानुक, अश्वमेध, दीर्घसूत्रता, विधारण, धूलीमय, सप्रहासम्, दौश्चर्म्य, किङ्किरात, लोकोत्तर, पुरीतत्, पिञ्जरिक, आप्तदक्षिण, त्वादृश, अतीन्द्रिय, प्रातःसव, सग्रह, मूलकर्मन्, सनता, स्वामिन्, चातुर्वर्ण्य, अवच्छेद, उद्वेग, उच्छ्वसित, सुदारुण, सुमुख, तरंगिन्, वामतस्, समीपग, कर्त्तर्, कुरु, ज्वाल, विज्य, हंसाभिख्य, सुषम, मन्त्राधिराज, श्लोण, भरुज, तृध, संज्ञपन, क्रुश्, पौण्ड्र, पाशक, भद्राह, स्फाय्, मृचय, नियोग्य, विपद्, परमार्थ, भूरिधायस्, ऋष्टि, धातुमन्त्, दैवविद्, स्म, धि, मूढ, प्राश्, जल्प्य, दशान्तरुष्य, वित्ति, अचर, चूचुक, धीवरक, अभिगा, सचिविद्, उत्स्ना, दीर्घायु, मुक्ता, दुष्टचरित्र, प्रावारिक, षण्मास, नगरस्थ, होतव्य, व्युत्पत्ति, नहुस्, ऊषण, अघ, भृत्यत्व, जीवितेश्वर, शीघ्रयान, मतिभ्रम, वृश्चिक, कटक, अनिरुक्त, नगरस्वामिन्, अतिधृति, भस्त्रिका, कुम्भक, देवमय, विस्मर्, शौव, अस्थान, इन्द्रजा, सस्नेह, आपार्ष्णि, पश्चिमाचल, युग्य, दार्व, धारासंपात, रक्ताशोक, स्वकाल, प्रलपित, भ्राजस्वन्त्, सुनीत, पापिन्, विप्, अभिद्रुह्, उन्नद्, गान्धर्वविधि, गान्धर्वविवाह, भूमिलोक, वायुसूनु, प्रशान्ति, कृष्णनयन, आस्माक, मदिराक्ष, सक्तु, सुबोध, पूर्वार्ध, परिपूरण, यन्तर्, मध्यता, छगल, सिद्धिमन्त्, प्रोत्सह्, वङ्क्रि, प्रतिकङ्चुक, हव्याद्, संहर्ष, श्लोण्, श्रद्दधानता, गुल्म, विनीति, जिघांस्, वृजनी, परिगम, गुडमय, घटिका, उत्तम, बुभुत्सु, श्वेतपक्ष, रम्यता, प्रतिभेद, अधीन, अपघन, श्वपच्, स्वयंवृत




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