संश्रु

संश्रु
संश्रु /saṅśru/ (формы см. श्रु )
1) слушать
2) узнавать
3) обещать




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अवशिष्, प्रत्यासन्न, इष्, ओम्यावन्त्, प्रणिधि, उत्सृप्त, दुश्च्याव, आस्तरण, गुच्छ, संबन्ध, अनभिव्यक्त, पर्च्, संपादयितर्, नौयायिन्, कठोपनिषद्, परिवर्तक, अस्माद्, द्रवत्, निमिष्, दरिद्रत्व, वृज, आटोप, औम, दण्डकाष्ठ, उपाहर्, स्मितपूर्वम्, अपभ्रष्ट, ब्रह्मवनि, स्पर्ध्य, प्रस्तव, अर्ह्, समानार्थत्व, द्यावाक्षामा, प्रतिश्रवण, कविक्रतु, मंहीयंस्, स्थास्नु, अम्भस्, सांशयिक, दन्तोलूखलिक, प्रतिलम्भ, सामात्य, पिङ्ग, अनाकम्प, वीतिहोत्र, प्रणप्तर्, नट, ईदृक्ष, निःशल्य, मुख, वितति, सविषाद, उपसेचनी, द्वाविंशतिधा, प्रतियोधिन्, मौर्वी, विवृक्ता, शर्मन्, यमल, ईश्वरता, गुणोत्कर्स, अयास्, उच्छ्वस्, सलिलज, हिरण, सर्भ्, गाण्डीव, भूतवत्, अधःस्थ, अजीर्ण, पराशर, आन्तर, अचिन्त्य, अनिल, प्रतिमार्ग, साधुभाव, देवसृष्ट, आभू, मृतपुरुषदेह, वल्कल, दंसुपत्नी, औकार, छागल, प्रान्त, दुष्प्रधर्ष, स्पूर्ध्, निनदिष, मियेध, उच्चावच, गुणवन्त्, देशिनी, ताम्रिक, अवस्तात्, अवगाहन, प्रत्यायक, भेद, विजि, हलिन्, मुरारि, वेदिका, संहा, अपर्तु, दक्षिणीय, कीर्तेन्य, °ह, भविन्, अभ्यती, नक्षत्रनाथ, तुषाररश्मि, कुञ्चि, देवीसूक्त, अधश्चरणावपात, निवेदिन्, राक्षसता, चारक, दुर्हणा, नभःस्पृश्, पार्श्ववर्तिन्, शङ्कु, तर्ह्, सुखघात्य, वल्लभता, वस्मन्, प्रतिप्रश्न, साचेय, एष, विवर्धन, विलक्षित, संक्लिद्, अपराद्धि, मौनव्रत, समाज, त्रपा, कोशल, हत, तुषार, लालय्, अतिरेक, विशी, भारवि, घोषवन्त्, अल्प, संप्रनुद्, मनोऽभिराम, शाठ्य, बिन्दु, समाचि, चम्पक, भागदुघ, हेतुत्व, डिम, टु, कुमारी, क्षयकृत्, मूत, कुलिक, सर्वपति, निम्रुक्ति, गुल्फ, वास्तव, कामचारिन्, अतिनृशंस, महाप्रभु, शतशीर्स, बाल, चक्ष्, तास्कर्य, जिहीर्षु, वध्रि, सुतर, शम्या, तुविष्ठम, विद्योतक, शकटसार्थ, दुर्निवार, बालातप, सभ्रूभङ्ग, तुरण्य, एमन्, सुदिनता, शाकुनि, महायुद्ध, होमतुरंग, षडक्षर, क्रोष्टु, वावाता, वस्, प्रहृष्ट, दुःशिक्षित, नववधू, सिक्त, जलौकस्, विकुण्ठ, अधिसर्, सत्कर्तर्, प्रजेश, मुण्डितशिरस्, वलयित, अनुगम्, प्राकट्य, बन्धुकृत्य, दिङ्नाथ, शिक्ष्, आलिह्, खाद, पाद्य, विनुत्ति




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