मन्मथलेख

मन्मथलेख
मन्मथलेख /manmatha-lekha/ m. любовное послание




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शतकृत्वस्, दिदृक्ष्, प्रतर्क, परिवह, रोदन, अनुरसित, प्रातिवेधनिक, आनील, महायज्ञ, वेन्य, नृभर्तर्, सहकारिता, परिणेतर्, अप्रज, मन्त्र, लल्, हौत्र, सरण, अहस्त, प्रस्नापय्, तत्काल, सोन्माद, शशक, सुरसरित्, सोत्क, बहुश्रुत, निर्धू, संव्यवहार, आशङ्क्, अपसार, वैपरीत्य, चोर, पोथ, चीनांशुक, प्राणयुत, चण्ड, हारिद्रक, संजिति, घण्टिन्, भुविष्ठ, परिश्रुत, माणिक्यमय, दंश्, सुकेत, विकट, शैली, तुरुष्क, देवमणि, विक्रयिन्, कण्, उत्तमाङ्ग, मर्मच्छिद्, निसूदक, प्रजिन्व्, स्थानीय, उपचिय, गुरुलाघव, मासानुमासिक, °धूर्गत, चातुर्वर्ण्य, वर्तमान, तालावचर, अपाज्, हस्तस्थ, हरित्, वेश्या, राजकीय, पुष्कल, यातर्, निरपवाद, अशरण, दीपन, निष्कलङ्क, समभूमि, प्रियकारण, प्रतिमुख, परिभोग, संनियम्, परिप्लव, परिताप, प्रियसंवास, आह, उद्रङ्क, दुर्हणा, प्रादेशिन्, चकोरव्रत, मन्त्रपद, निर्मा, गर्धिन्, दीर्घकर्ण, दानशील, दर्वी, अनन्तर, पण्यस्त्री, निवसति, निःसत्यता, भिक्षुक, गीतनृत्य, शस्त्रपत्त्र, वृति, संस्वप्, नैयायिक, विक्षर, नैकधा, बृहद्वयस्, वरूथ, गणित, कामान्ध, क्षैप्र, संधिविग्रहक, पुरोद्यान, जुष्ट, पेय, पारुषेय, व्यपेक्ष्, दम, व्यपगत, गुह, रसात्मक, प्रमातर, अम्भोज, जिघत्सा, प्रजानाथ, वराहु, पुण्यशील, वदितर्, झौलिक, अतिलोहित, परिज्ञप्ति, रतिप्रीति, निकूल, कलियुग, ऋतयुज्, दैववश, देवकुल, वृक्षदेवता, शुण्ठि, निर्व्याज, द्रुम, पुलाक, स्वस्रीय, जलज, अचेतन, सिच्, पुष्पकाल, त्वेष, प्रगृह्य, शम्, दिवानिद्रा, एकतर, स्रग्धर, विस्रुति, पुरोरुच्, गृहद्वार, धूर्षाह्, त्विषिमन्त्, उष्णालु, वलयिन्, निकर, मन्त्राधिराज, दित्यवाट्, संप्रदान, स्वेच्छा, संलय, प्रतिदर्श्, संराज्, समदुःखसुख, वर्षारात्र, स्थिरयौवन, उत्थ, जम्भकविद्या, अमावासी, जलविहंगम, वेशन्ता, धूपक, भृङ्गाली, पाशहस्त, नद्, सान्द्रता, प्राङ्मुख, करम्ब, सारङ्ग, स्तम्भिन्, जलाधार, वागृषभ, संवानय्, मैत्री, धरणीधर, समानार्थत्व, व्यभिचारिन्, °दंसु, दार्व, °धन्व, निर्विशङ्क, असमाप्त, हम्म्, अप्राण, मौच, ईश्, जय, भवाब्धि, निर्विमर्श, शारीर, सप्तविंशत्, अभिनिविष्ट, प्राश्, निरागस्




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