द्वादशार

द्वादशार
द्वादशार /dvādaśāra/ (/dvādaśa + ara/) bah. имеющий двенадцать спиц




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उद्वत्, क्रव्याद्, °परिच्छद्, समृद्धि, हृषीकेश्वर, पोषयिष्णु, वृद्धसृगाल, धर्मज्ञान, वस्त्र, नगररक्षिन्, मुखशशिन्, प्राज्य, संश्लेष, लोकपाल, पाथोनाथ, वषट्, अभिरज्, फणवन्त्, हाटकमय, अञ्चित, धूपय, बुद्धिपूर्व, तावत्कृत्वस्, खल्, आनन्दमय, अनाख्येय, दांपत्य, मघव, सुसदृश, मैत्रिन्, कौमारचारिन्, वेपस्, विवेकिता, सुधामय, निः-शरण, अप्रमत्त, भोगवन्त्, पृथुता, मधूक, अरम्य, स्वपत्य, परिमन्यु, प्रशंसक, देशक, उडुनाथ, सितमणि, स्फुलिङ्ग, वीरण, बुद्धीन्द्रिय, हयशिरस्, प्रादोष, राष्ट्रिन्, ब्रह्मक्षत्र, तत्कर्मकारिन्, नीलाश्मन्, अभ्याधा, हलिन्, धातुचान्द्रका, अलिनी, दारग्रहण, शतगुण, उदक्तात्, अष्टपाद, शम्भविष्ठ, एषणा, कुवलय, जंहस्, पूतिनासिक, रमणीयता, स्तोक, व्रीहिन्, यमसदन, उपलप्रक्षिन्, शस्त्रवन्त्, स्नेहल, सहस्रधा, मृज्, स्वपराह्णे, दुर्विभाव, वृषपर्वन्, स्वगा, रसिक, जगतीपल, वर्धन, समवृत्ति, विवाह, हिंसन, उपश्लिष्, अन्तःस्थ, ऊर्ध्वकर्ण, मौग्ध्य, मांसरुचि, असूया, मृधभू, चत्वारिंश, नृपात्मजा, व्रतरुचि, चतुर, विनाशक, वेसर, संरोपय्, छदस्, चिन्तित, कटकरण, भेदक, परिरक्षक, अब्द, दीर्घराव, तारकाक्ष, ककार, घर्मदीधिति, वाताशिन्, कुशील, गुहाशय, द्विपारि, प्रेङ्ख, सर्ववर्ण, वनिक, अकूपार, महिला, इति, उपोषण, मध्यमपद, दुःखोपशमन, निष्यन्द, जीवसू, रघुष्यद्, पिडका, माध्यमक, अवनति, सुजनता, हित, प्रयति, पूजित, सधन, त्यज्, विस्फर्, जकार, कुलान्तकरण, श्वित्न, पादात, अग्रू, मिष्टान्न, विहिंसक, शशयु, भाण्डागारिक, समरण, नन्तर्, निर्ममता, वारिवह, वृता, शीतभानु, शितिपद्, परिपाटी, प्रलुभ्, द्वरिन्, वंशवर्धन, निगण, निर्गम, समाया, रूप, देवर, परिपाण्डु, प्रातःसंध्या, समर्थ, चेष्ट, आयुर्वेद, भण्ड, सुश्री, क्रमयोग, दृशति, दक्षिणा, बृहद्दिव, प्रामाणिक, श्या, निराकुल, रजिका, श्री, कङ्कत, कुमनस्, मनोगत, विमुक्त, परावसथशायिन्, दृढता, मदिरदृश्, उपस्तुति, हरिश्चन्द्र, आविद्, उत्पात, अपिधाव्, सवन, कार्मण, उपसृष्ट, शरीरकर्तर्, सद्वृत्त, जन्, पश्चार्ध, प्रवन्द्, दत्तक, श्रेष्ट्हिन्, त्रिवर्ष, काकुद्, श्रावण, वार्ष, विचरित, मृक्षिणी, मत्कुण




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