ग्रहीतर्

ग्रहीतर्
ग्रहीतर् /grahītar/ m.
1) тот, кто что-л. берёт или присваивает
2) покупатель




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अनुगुण, असंनिधान, चन्द्रमस्, उपारुह्, क्रयविक्रय, तूलक, ताड, द्वयाविन्, नियुज्, द्वारपाल, परमाक्षर, ग्राहिन्, निर्लोभ, तूल, सृप्, °आख्यायिन्, विकस्ति, गर्हा, यमलोक, ह्रादिनी, पक्तर्, पनस्यु, चिर्भट, ऊर्म्या, पुण्यकर्मन्, मदावन्त्, यादृश, निधिपाल, आबन्ध, संवत्सरीण, निरुत्सुक, सहस्रभृष्टि, इन्दुबिम्ब, विमर्शिन्, जेमन, ओम, महिमय, अनिर्वृत्त, वरण, अविद्ध, प्रणेजन, लक्ष्मण, संनिधि, सुपत्नी, आत्मबोध, साचिव्य, विनिद्र, भोः, दूरग, वस्मन्, कीदृशी, सलोमन्, श्नप्त्र, अनुअहम्, परिकर्मन्, अविनीत, नक्ष्, निर्हेतु, मोक्तर्, पटर, घृणीवन्त्, समर्य, समानाधिकरण, सनिति, अजेय, नदृश्य, कङ्कट, शिवदिश्, अर्थकाम, जर्जरत्व, अनिष्ट, उपसर्जन, शयन, °संज्ञ, विक्री, शची, सविकल्पक, सुनिश्चय, सांयुग-कु, मूढचेतन, योषन्, देवया, प्रस्तारिन्, निस्तर्तव्य, संविभाग, दूरेअन्त, वैशस, प्ररेचन, पिष्, जीवनहेतु, दण्डपाणि, अमन्तु, वज्र, भविष्य, प्रतिबल, केवर्त, हविन्, कोपय्, निरभिमान्, प्रवृद्ध, उपपादय्, आसन्नवर्तिन्, सपुलक, रक्तिमन्, क्रुध्, गाढ, खञ्ज्, अश्रद्धेय, अधिविद्, त्वर्, पन्यंस्, पदस्थ, दारुण, महीन्द्रेन्द्र, अभिदीधि, क्रोष्टर्, द्वीपिन्, असह, आज्ञाकरत्व, अशिव, नग, प्रनृत्त, यवीयुध्, काय, हिरण्यपर्ण, पारलौकिक, निरहंक्रिया, धनसनि, प्राणवन्त्, स्वरूप, षकार, धर्माचार्य, सच्, विनिर्भा, स्थण्डिल, प्रतिकृति, गुप्ति, शाखामय, पृथिवी, ली, बिन्दु, शौनक, इन्द्रप्रस्थ, कठिन्, तद्वश, महानिद्र, वास्तुविधान, प्रतिकर्मन्, स्खद्, व्रटवन्त्, तरुषण्ड, वेश्य, अनपत्यता, क्षुल्लक, बहुलीकृत, शस्, चतुरङ्ग, समागत, भूदेव, वव्रि, शोधक, प्रतिलाभ, जूर्व्, संजय, राजश्री, निपत्, मृद्वीका, विरावण, गृहमेधिन्, आर्यमिश्र, सहदण्ड, वाध्रीणस, शक्तिधर, कार्यहन्तर्, जागर, बर्हिःष्ठ, प्रह्वा, उत्पत्ति, वर्षाशरद्, नृलोक, विशङ्कट, मन्दग, संशंस्, भरित्र, अन्तस्ताप, आनृशंस, वैयर्थ्य, अंशु, सिद्धि, हरशेखरा, पूर्वभूभृत्, अम्लान, अभिप्रनु, मन्, नगरस्वामिन्, चित्रग, द्रुति, गुच्छ, मरीचिका, सटा, न्यून, दुर्धर्षता, क्षितिभुज्, सुगात्री, प्रेयसी, शूर्प, विरोग




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