त्रिभुवनगुरु

त्रिभुवनगुरु
त्रिभुवनगुरु /tribhuvana-guru/ m. nom. pr. Владыка (учитель) трёх миров — эпитет многих богов , особ. Шивы




Случайная выборка слов

घसि, सुसत्त्व, विश्वावसु, निद्रागम, यायिन्, लुण्डी कर्, व्योमगामिन्, खेलन, खड्गहस्त, ध्राजि, सूपकर्तर्, कमलनयन, रन्, सदसत्फल, स्तृति, मन्त्रपद, राजयोषित्, उपदर्श्, अनहंकृत, विगतज्वर, वाट्य, विपाक, दशकण्ठ, रजस, गारुड, प्रभु, अगोचर, सृष्टि-कृत्, आखेट, भारवि, सम्यक्, अवसादय्, कानीन, चेतन, अधस्, उद्घात, , कोशल, अवस्थापय्, प्रपञ्चक, विस्फुल्, गर्, अरुष, चिञ्चा, नलिनीदल, प्रमृड, सदस्पति, निस्त्रंश, पूर्वोत्तर, सनेमि, वृत्रशत्रु, प्रतिवेदम्, सह, कद्रु, अचलन, स्वैर, सान्त्वन, नौ, संयुज्, नवचत्वारिंशत्, निःसत्त्व, अनुक्रमण, द्रव्यजात, धूसरित, विचरन्त्, अर्किन्, आशास्य, निचाय, प्रोत्सर्, हितकारक, साहस्रक, अवाच्य, वशगामिन्, ग्रप्स, सुसंभ्रान्त, हट्ट, अजा, निर्मोक्ष, निघ्नक, रोहक, मद्र, भुरण, प्रणव, शन्तिव, ब्रह्मसावर्णि, सुसमाहित, शीतोष्ण, पौच्छ, विरक्ति, मोहनीय, दातृता, गाहन, अव्याज, देशय्, द्युसिन्द्नु, दुर्वार, विधर्षय्, बन्धय्, पाकत्रा, वृषपर्वन्, निवासन, अपरक्त, असंज्ञत्व, वेन्, शरीरिन्, कार्यवृत्तान्त, स्वप्न, प्रतिबोद्धय्, विभूति, शिल्पिन्, आहुति, तदनन्तर, पान, प्रत्यृतु, शबल, द्विलक्षण, मृगेक्षणा, कुण्डल, महारथ, उच्चत्व, निघण्ट, क्षितिप, आशाजनन, पद्मालय, अपरा, षट्सहस्र, छायावन्त्, जनता, प्राज्य, सत्यवादिन्, वर्षासमय, पठ्, रेतस्, प्रमीतपतिका, भिक्षाटन, व्यथा, अच्छ, अमी, दृग्रुध्, धनवर्जित, सत्त्रिन्, हिरण्यदा, संवलित, अमरराज, फलागम, भोगनिग्रह, सममति, मूर्तिमन्त्, आदिन्, तुषारकिरण, पन्था, गोपथ, मृदुवाच्, समवतार, कृशोदर, उन्मर्ज्, तोयमय, समयोचित, समानिचय, ह्रेपण, अतिथि, प्रधन, संनिपात्य, विनिमय, स्राव, विपुष्प, सदर्प, प्रतिषेद्धव्य, विशिरस्, गुरुगृह, आवऋस्, सुखिन्, राहु, आत्मत्व, अवदान, वाजसा, द्रू, करुण, अदेशकाल, आर्यवृत्त, अश्वत्थ, समुद्रतीर, निश्चर्, वीजन, परिसमाप्ति, यज्ञिन्, संदुह्, विधिज्ञ, कथित, विविध, शब्दापय्, शक्रदिश्, विनोद, वानर, प्रणाश, समनुदिश्, माधुर्य, देव-गण, अप्रसिद्ध, निरन्वय, उत्पद्, निग्राह्य, प्रभ्रम्, शश्वन्त्, वर्ति, लालक, सिम




    Яндекс.Метрика
    словарь санскрита 2009-2012 ©LingvoKit


мастер на час минск, литовский словарь