बृहद्गिरि

बृहद्गिरि
बृहद्गिरि /bṛhad-giri/
1. bah. громозвучный
2. m. nom. pr. отшельник




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परिधि, विगतज्वर, चिन्तापर, पौर्वदेहिक, जिज्ञासु, नकिंचिद्, प्रत्यायक, निर्वैरिण, पुष्कलावत, डाल, अभ्यन्तर, अपद, सौश्रवस, स्तुका, सकर्ण, आवश्यकता, प्राप्तरूप, निगम, कराङ्गुलि, प्रात्यन्तिक, वकल, खेट, संनहन, नयशालिन्, असमद्, पङ्केरुह्, प्रतिभ्रू, अभ्यापय्, कर्दम, पामन्, मम, मेडि, विस्रंस्, सोमसुत्या, संज्ञित, निर्मज्ज, विख्याति, तान, वीरहन्, यज्ञिन्, चित्रवर्तिका, राजकार्य, आहिंस्, आविष्कार, आपत्ति, तुल्यवर्चस्, पुरुषोत्तम, तटाकिनी, ताण्डव, तदवस्थ, प्राकरणिक, सिध्मल, वृद्धसृगाल, पूर्वापरदिन, तत्पर, वादिन्, सूक्ष्मत्व, कनीनक, विपश्चित्, हार्द, क्रीडि, अब्ज, विहस्त, कथित, ढकार, विलुण्ठन, इन्द्रवंशा, श्रावण, तदनु, धीवर, शुष्ककाष्ठ, पल्लिका, दिविजा, भैक्षवृत्ति, °विद्वेषक, त्रिककुद्, शककाल, उदात्त, मूर्छा, वावातर्, यमजात, नवत्व, तैर्यग्योनि, प्रमय, अनिरुक्त, वृक्षमूल, गुणच्छेद, हंसाय, पौरसख्य, महाशय, मीन, आत्मत्व, सुखदुःख, जागर, परिकम्पिन्, गोशीर्ष, कूलवती, एवंगुणोपेत, संपत्, महारष्ट्री, नस्त, स्रिव्, परिहृति, एकता, आपर्च्, प्रतिष्ठा, विमत्सर, दुरवबोध, अनिर्णीत, चर्मज, शाल, अचल, अवहस्, वसुत्ति, चिकीर्षित, नृयज्ञ, राजद्वार, अनुसर्, चन्द्रमुकुट, तनुच्छद, दौश्चर्म्य, ऋक्षी, भणिति, संविद्, कितव, तुन्नवाय, दृढायुध, सत्यमूल, बीजकाण्डरुह, गिरिश, क्वाण, कासिका, उपे, श्रुष्टीवन्, वृषभध्वज, संसर्प्, दुश्च्यवन, वचन, संधुक्ष्, कमलवन, कणवाहिन्, भैक्षाशिन्, अनुविस्था, अभ्युष्, निरङ्कुशत्व, उचथ, मास्, परशुराम, स्युड्, चिकुर, प्रसङ्गिन्, सौवीर, दशशत, स्फाति, पराभूति, भवन्त्, मनस्, निर्मर्ज्, उपप्लु, मिहिर, विनयन, शमिन्, उदारत्व, असजात्य, बस्ति, व्यश्व, उदुम्बर, °वृन्तक, मंह्, निर्ऋति, म्रक्ष्, स्कद्, पठन, °मथ्, समुद्र, प्रसाधन, अभिनव, अपव्रत, विष्फुलिङ्ग, न्यग्भावन, वैशंपायण, भैक्षचर्य, म्लेच्छवाच्, शतरात्र, धान्यमय, गह्वर, त्रिदिवौकस्, संहार, परीपाक, देवच्छन्द, खलु, शैशिर, संप्रणेतर्, मायाविन्, अजातशत्रु, साधारण, कै, दत्त्वा, मुञ्ज, दासीदास, अपेक्षा, तृप्तिकर, रूषित, अनामुक्त, विश्वत्र, नैरुज्य, वाक्यार्थ




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