श्रेणि

श्रेणि
श्रेणि /śreṇi/ f.
1) ряд, линия
2) стая
3) количество
4) класс; сословие




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धर्मारण्य, बरासी, मृदुतीक्ष्ण, मदान्ध, उद्भव, वसुधा, सरोजिनी, अर्बुद, खख्, गणना, अवहन्, प्रकरण, वस्न, प्रचित, मन्थ्, समाचर्, कूर्म, संतनि, पिक, अजातारि, रथ्या, वितमस्, अविनोद, सकस्रगुणित, प्रभाव, अनुवाक, यज्ञपति, परिचिन्त्, परिश्रम्, विग्रह्, अभिषिक्त, नवम, चित्तभ्रम, शेष, रा, सौमिल्ल, दिनेश्वर, चीनांशुक, सच्चिदानन्द, एकभूत, प्रावृण्मेघ, नागेन्द्र, लोक्य, निघण्टुशेष, क्षीब, परदेश, शिशिरात्यय, परायण, अपृणन्त्, वशवर्तिन्, कुटुम्बिन्, क्षय, क्षैत्र, अत्र, सप्तविंश, विपक्षीय, द्विस्वर, महोदधि, वारिमुच्, आवेश, मेदस्विन्, श्वसित, जरठ, उपद्रव, वृद्धयोषित्, दिधक्षू, सत्यवती, हयवाहन, क्षुधा, जना, पार्श्वचर, विंश, संलभ्, कर्णिका, धूपिन्, यथाभिलषित, निवात, नटक, क्षौर, हैम, सर्वधा, कामवन्त्, गा, परिसर्पण, दशशत, दण्डधारण, सुचिर, असदृश, संपश्, अध्वग, महावद, श्ववाल, चिकीर्षु, प्राश्, क्रमागत, शिवायतन, महेश्वर, भक्षक, उल्लेख, वलिन, विशुष्क, जघन, सलावृकी, वाप्य, प्रख्य, चतुर्मूर्ति, जनि, द्रव्याश्रित, दक्षिणपश्चार्ध, संशास्, निशावेदिन्, प्रदातव्य, द्विपिनी, वर्ष्या, प्रवप्, निचृत्, निष्कुल, धावितर्, एकरात्र, अभ्यवहर्, उन्मि, ब्राह्मणजात, परिक्सीण, आत्मज्ञ, नित्यदा, परिणाहवन्त्, निनशिष, सर्वगत, निरातङ्क, मत्स्यबन्ध, युगादि, कृष्टि, हयप्रिय, गुणोत्कृष्ट, क+ठ, प्रतियुज्, अनिच्छन्त्, दातु, संन्यासिन्, समास्था, दैवयोग, अवलिप्, व्यत्यास, समानकाल, बलदावन्, दम्भिन्, वाजिन्, प्रतिमन्दिरम्, गुध्, महामति, शीतली कर्, विमुग्धता, अजल्पन्त्, स्वनुगुप्त, वचस्य, नखदारण, सुप्रीत, हिरण्यनिर्णिज्, विष्णुगुप्त, तिरोऽह्न्य, विराज्, रसरत्नहार, शतवन्त्, फलागम, अनिष्ट, चण्डकिरण, प्रतिबन्धिन्, धूलन, वेदाध्ययन, कृतयुग, मर्त्यभुवन, समनुव्रत, मदीय, ऋणकर्तर्, ब्रह्मजुष्ट, मरीचिमालिन्, अंसल, कृष्णवाल, अर्थवत्त्वा, शुण्ठी, महौषध, नीलाम्भोज, तिल, मुकुन्द, हव्यप, भोग, लेपिन्, त्रिषाहस्र, वधजीविन्, शीत, आपर्च्, सवेपथु, दुल्, षष्ठी, महर्षि, भट्टि, आवस्, अह्, मातृक, सावर्ण, कालायसदृढ, शस्त्रभृत्, पर्वन्, वात्स्यायन, नेयार्थ, शंवन्त्, दुष्मन्त
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