वेदानुवचन

वेदानुवचन
वेदानुवचन /vedānuvacana/ (/veda + anuva-cana/) m. повторение или чтение Вед




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अनर्घरघव, गुणहीन, सुरस्त्री, चक्रनाभि, जीवन्त्, बहिस्, रुद्रिय, मूल्य, रूपय, पूर्वापररात्रि, दशग्व, स्मार्त, ग्रथन, त्रिचक्षुस्, मादृश्, युक्तरूप, अचिन्तित, मघ, निबिडय, सूत्रकार, क्रिवि, अविषय, आतम्, प्रतिश्रवण, आकौशल, रुशती, अध्याय, द्विक, पात्री कर्, पतन्त्, सपत्नी, पित्त, अनासाद्य, सुदेव, संधा, कारु, पातोत्पात, रुद्र, खञ्ज्, मा, अनसूया, संदिह्, अष्टरसाश्रय, जरा, हूण, विशोषण, ब्रह्मद्वेष, दुर्यशस्, प्रतियान, धायु, बीजकाण्डरुह, चातुर्वर्ण्य, संसक्ति, मधुरिमन्, विघातन, रिश्, कुप्, आलम्भन, दुरापन, पुरुषाद, क्रतुमन्त्, शोक, श्यामता, धर्मधृक्, अभिविमा, पत्, युगशरम्, दर्पित, श्मश्रुधारिन्, क्लीब, प्रतिहेष्, जयलक्ष्मी, सिध्म, प्रोष्ठ, तिलपर्णी, विचृत्, नास्तिक्य, नोदन, रथ्या, प्रियभाषण, वियोगवन्त्, भक्षिन्, भृत्यभाव, इतिवृत्त, लब्धि, विरोचन, ब्रह्मकिल्बिष, अतिवृद्धि, अग्निदग्ध, वशत्व, उन्नामय्, अस्म, यूथप, अतिनिर्बन्ध, चतुर्मुख, चलय्, संकर्, जीवन्मुक्ति, निर्णिज्, प्रगुणय, प्रदेय, लुठ्, अतिजीव्, प्रतीक, शतशीर्स, हिरण्यपुर, अधी, प्रवाचन, पूर्वाचार्य, स्तूप, तद्वयस्, परिभय, राष्ट्री, प्रक्षालन, मुग्धबुद्धि, निर्धन्त्व, सश्वास, मर्श, स्तुत्य, मनुष्वत्, सौध, विभूषण, समुत्सारण, संस्थापन, दारकर्मन्, वीणावाद, सूर्यप्रभ, यशस्काम, विशीर्णत, अनुप्रस्था, शिखामणि, आलक्ष्य, अङ्ग्, अनहंकृत, मीमांसक, वेदिका, अनुनासिक, जिह्मग, निष्षह्, आगार, पाटव, अतिसंक्रुद्ध, धनुर्ग्रह, उष्ण, अपण्डित, जनता, रेष्, आसेचनवन्त्, वाम, पृषत्क, उपरम्, तविष्या, भगोल, नैश, पणितर्, चन्दनमय, औत्पत्तिक, उत्तमतेजस्, निर्मन्यु, प्रस्यन्द्, आसदन, क्षुद्रजन्तु, विवदिषु, क्लान्त, भस्मीभाव, धर्मशासन, वान, रूषित, सोदर्य, नीलपिङ्गल, भरतवाक्य, तीक्ष्णाग्र, समाम्नाय, क्षयण, दुश्चित्, आच्छादक, समीरय्, घर्मभानु, निन्द्, आघात, प्रविविच्, प्रतिमन्, अश्वत्थ, वृद्धोक्ष, पूर्वलक्षण, वाजिन्, पांसुक, प्रदर्, भिक्षण, विप्रवासन, कुमारिलस्वामिन्, नाति, द्विपद, हत्या, पत्नीय, धनोपक्षय, सेवक, देशभाषा, दमयन्ती, मद्वन्, विग्रहण, परस्व, निर्हरण, उज्ज्वल्, मणिमाला, निरत्यय, श्रेयोमय




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