हितोपदेश

हितोपदेश
हितोपदेश /hitopadeśa/ (/hita + upadeśa/) m. «Доброе наставление» — назв. сборника басен и нравоучительных рассказов




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आशावन्त्, अतिजगती, देवजन, छन्द, भक्तद्वेष, ससंकेत, कूजित, गोतम, मिहिर, ह्नु, प्रतरम्, ईर्म, यद्वृत्त, नौयायिन्, रोष, झंकृति, वेपथु, प्रवाद, जान्वस्थि, व्यथ्, विज्ञ, अद्मन्, वैमानिक, प्रोदक, संस्राव, वह्निमय, निपातिन्, दन्तमांस, परोपकरण, निरवद्य, हिरण्यबाहु, द्वयोस्, निबिडय, सुरथ, पवित्रता, काम, संमूढ, वृता, निर्हा, छवि, अग्निशरण, नियम्, विघन, भुज्मन्, उद्गातर्, जीवन, दुर्मन्त्र, अलक्ष्य, समवृत्त, रणभूमि, विषिन्, दक्षिणाप्रत्यञ्च्, लक्ष्य, परिक्षेप, ऐश, विनाशक, मृदु, वचस्यु, सन, सहधर्मचरण, वल्ली, दर्शनीय, उत्कट, पञ्चनद, वर्षिन्, अनुष्ठा, दशगुणित, सम्यञ्च्, नगावास, रम्यत्व, उत्सादन, गृहमेध, यकार, अतिकोपसमन्वित, आस्वादन, रशना, संस्थिति, प्राणिन्, अघमर्षण, शनैस्, सामुद्र, श्रीखण्ड, दत्रवन्त्, व्यापद्, नेय, शाकल, दैर्घ्य, कर्कि, वनग्रहाहिन्, स्त्रीहत्या, ढौक्, अपाश्रि, बर्जह, चित्रशाला, अधेनु, यष्टर्, उपशुभ्, विद्वज्जन, सयुक्त्व, छात्त्र, परशर्, शास्त्रदृष्ट, शङ्का, विनिवारण, ह्रादुनि, शौरि, उपाश्रि, तनूरूह, श्वेतच्छत्र, दुरावार, द्विभाग, हिठ्, अतिया, जम्भ्य, रिच्, तावच्छत, द्वादशाह, आश्वस्, संदर्श्, पत्त्रारुढ, विप्रुष्, गुल्फ, कौस्तुभ, नूत्न, आसर्, शिच्, जातु, नियोधक, वर, धनलोभ, किञ्जल्क, अनुसंव्रज्, समतिक्रम्, संनिधि, ब्रह्माणी, स्तेन, सूनृत, लिह्, काञ्चनमय, प्राचण्ड्य, अपटु, प्रत्युद्गम, यु, रथिन्, पारुषेय, उपधाव्, अन्वयिन्, सुविध, अपथ्य, असि, अम्बा, परिच्छेद, हंसगामिनी, धर्मलोप, सौरिक, नक्ष्, बभ्रू, अधमयोनिज, सजित्वन्, भूमिपरिमाण, शलातुर, व्यतिहार, अमरेश्वर, ईष्, त्रिमात्र, कुल्मि, आदिभूत, तविषीवन्त्, निराशीभाव, गृह, शून्यी कर्, परिदिश्, नरवीर, निदाघ, स्तोतव्य, प्रत्ययप्रतिवचन, प्रातःकार्य, सांग्रामिक, परिघात, दृष्टिपात, घ्र्षु, ऊषर, दत्र, हविष्करण, किस्, धर्माधिकरण, शल्य, कलिल, शीर्ति, नू, वपुष्मन्त्, शुक्लवस्त्र, चलय्, संज्वर, अपनय, सूचीक, प्रत्यायन, आश्वत्थ, श्रवस्, यज्ञभूमि, पण्, विधाव्, पूर्वपथ, आर्यजुष्ट, ब्रह्मवन्त्, वृद्धसेवा, अनीहित




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