तन्त्रकार

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तन्त्रकार /tantra-kāra/ m. составитель руководства; автор учебника




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पृथुता, परिश्रुत, संधिविग्रहक, सुहोतर्, तीव्र, द्योत, हृति, सुहन, दान, शिखण्डिन्, अतल, सन्मङ्गल, सांशयिक, शववाह, पोगण्ड, नभस्मय, मुण्ड, कामरूपिन्, प्रबोधक, सुजनता, अद्रि, भूषय्, बधिर, मृतिमन्, काशिक, दृष्टश्रुत, श्रथ्, तल, नालिकेर, समुद्रयात्रा, उत्कर्त्, शाक्यमुनि, निषेव्, वेन, शरण, वीरुध, शची, दरद, निप, अनुहर्, कन्दल, शिक्षेण्य, दूत्य, इत्येवमादि, शोच्य, अपरान्त, शीर्ष, शतस्विन्, अनिमिष, प्रतिमान, प्रत्यनुनी, परिस्रव, अभिनभ्यम्, गोत्रनामन्, राग, समुन्मिष्, सुकुमारत्व, शवसान, नाविक, प्रतिषेद्धव्य, उपादाय, जिह्वामूल, पक्षधर, चलाचल, भट्टिकाव्य, अरति, तोयराज्, उत्कल, मितभाषितर्, प्रत्यङ्कम्, धनलोभ, कन्द, द्विरात्र, प्रयुज्, पानीय, षट्पद, तनस्, प्रणिपतन, नवदशन्, रणभू, तैलपात्र, क्षमता, उदिति, वाग्विद्, प्रवन्द्, उपोद्घात, द्विजलिङ्गिन्, सपत्नतत्व, कम्पित, उपमेय, शठबुद्धि, मान, टीका, मोक्षेच्छा, तुञ्ज, वर्ज्य, रोचक, विहारवन्त्, प्रत्युक्त, जनप्रवाद, शार्ङ्गिन्, अवबन्ध्, भूमि, दशा, संहा, चतूरात्र, कालधर्म, कक्, प्रव्रज्, वासार्थम्, नवांश, किंमात्र, साहचर्य, दत्तातङ्क, देवानीक, निवेदिन्, विशङ्का, तविषीमन्त्, देवपुत्र, ऋजीति, उपविष्ट, यक्ष्म, नृलोक, समुपया, अधरोष्ठ, आघ्रा, ऋइजीष, स्फुर, संभाषण, कुभर्तर्, प्रभविष्णु, एतर्हि, परिषद्, समग्रवर्तिन्, बह्वृच, रुक्ममय, दुर्विषह, °पाणिन, नौ, सत्कुल, सर्पराज, उपोष्, सागरगा, संमुख, शासितर्, साति, अग्निशिख, पञ्चास्य, निर्निद्रता, स्त्रीघातक, अभिक्षदा, तेजोद्वय, पृथुबाहु, सुत्रामन्, वीच्या, चित्रलेखा, पङ्केरुह्, षष्टि, दर्व, संतोष, लिट्, संज्ञित, अकिंचन, व्लेष्क, चेतिष्ठ, दालिक, निःशेषता, धृष्टता, कुशूल, कनकसूत्र, धृष्टि, संख्या, वयित्री, वारह, शालभञ्जी, श्रेष्ठ, स्योनशी, कटुक, मित्रद्रुह्, °अर्दन, प्रकाशन, प्रतुष्टि, वार्षिक्य, कुचन्दन, स्फिगी, कार्मुक, प्रसादक, वर्धक, नगाधिप, प्रयोजन, विशाल, सह, आश्रमस्थान, सूर्क्ष्य, यथार्थनामन्, विहिति, महाभाग, निः, मधुरक, रक्षस्, प्रविविच्, परित्याग, ध्वंसक, प्रतिच्छन्द, समाप्, समांस, मानाधिक
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