विस्पन्द्

विस्पन्द्
विस्पन्द् /vispand/ (формы см. स्पन्द् ) вздрагивать, подёргиваться




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गाथिका, आयत, प्रतिलाभ, °प्राय, बहिर्द्वार, अत्रा, अरणि, सांयुग, लास्य, चात्त्र, द्रोहभाव, विजाति, लोग, दीर्घकाल, दृशि, श्रम्, कुलतन्तु, लिख्, संतेजय्, कतर, परकार्य, अदृप्त, उत्तरासङ्ग, °नस, विधारिन्, महीतल, प्रत्युन्मिष्, संयुग, वीचि, विश्रि, अर्थवत्ता, सुरालय, जुष्टि, अर्थकाम, बलपति, दा, त्रिदशालय, संयुज्, कुत्स, परिज्मन्, निःसुख, श्रन्थ्, विरोग, स्तनपान, प्रहस्, शकुर, जूर्णिन्, दुर्-आशा, चलित, दीनमनस्, पुनर्, पयोधर, सुखदुःख, आज्ञाभङ्गकारिन्, सामयिक, तथ्यतस्, जम्बूखण्ड, क्षणान्तर, सौकर्य, व्यद्वर, प्रेषित, मरुत्सहाय, लिखन, हैरण्य, सित, अतिशक्वरी, घर्ष्, स्थेयम्स्, शब्दार्थ, प्रस्यन्द्, सूर्य, समानप्रतिपत्ति, स्फुण्टय्, क्षितिधर, श्रोण, स्त्रीघातक, निष्, निसर्गज, प्रसच्, पूर्णचन्द्र, निकर्त्, गर्ध्, धय, अतिनिर्बन्धतस्, युध्मन्, भू, जाम्बवान्, चर्मण्य, नासापुट, ददाति, सिद्धक्षेत्र, पञ्चवर्ण, असाधुवृत्त, स्नातानुलिप्त, मम, निभीम, अवचर्, समुत्था, सुष्टुति, हार, सरसीज, लोकेश्वर, कुलिशभृत्, हला, एकपाद, अणिमन्, मृज्, वर्धिष्णु, कीर्तन, प्राकरणिक, शीत-दीधिति, मूलप्रकृति, वाजसाति, पोत्रीय, सामान्य, भासस्, नाटाम्र, अतर्किन्, अवगाह्, वीरप्रसू, दिधिषु, दुर्लङ्घ्य, ह्रस्वकर्ण, परिलम्ब, निनृत्स, अन्तःस्थ, मुखवर्ण, अवतरण, अद्, आर्यजुष्ट, संयुज्, महासती, पुरीष, दैवहतक, भरुज, नैर्गन्ध्य, विद्मन्, साक्षेप, आचार्यता, ससुत, जीवितनाथ, प्रतिबोधिन्, सर्वराज्, ह्नु, उत्प्लु, °ह, मृति, चरित्र, परिवर्तक, भाविनी, अकर, हञ्जि, उपलिप्, गन्धक, मौन, सुकथा, शुभदर्शन, परिभावुक, कतिपयरात्रम्, ऋणादान, मोघ, अवलिप्तत्व, पर्, °लोभिन्, दुःखमोह, संदानित, वादन, कर्करी, सांनिध्य, पुरोडाश्, भास्, सुविदित, उज्जयिनी, दुर्मन्त्र, नैकधा, वाटक, सपिण्डी, दुराशय, संशीलन, पद्मगृहा, नामधारक, विनिवेश, रजनीरमण, उख्य, विशिरस्, सुलक्षण, पृतनायत्, जीवितान्तक, धातु-कोश, परिबोधन, शाद, सावेश्य, सामक, दार्भ, केनेषितोपनिषद्, शुचि, स्तनपायिन्, °विगर्हिन्, विपणि, चतुर्विंश, , दुष्परिहन्तु, स्नेहल, गिरिष्ठा, अश्रु, भारवन्त्, तादृक्ष




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