संध्याबलि

संध्याबलि
संध्याबलि /saṅdhyā-bali/ m. жертвоприношение, совершаемое в сумерки




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भिक्षावन्त्, व्यवधा, निर्वृति, अभिनी, प्रावर्, व्यवस्थिति, विष्टि, अभिसंपद्, चपला, महि, श्लेष्मण, पतिघ्नी, सोमपति, निर्विशङ्क, राजेन्द्र, संघर्ष, °भासिन्, निदा, विद्विष्, यामिनी, हिमवत्सुत, तोयवाह, सर्वज्ञता, कालनेमि, दंसनावन्त्, रजतपात्र, बिस, कन्य, स्तोकीय, धीवन्त्, काश्, आगमन, दुरवबोध, दिगम्बरी, विधु, उपाधि, तुषार, पूर्णेन्दुवदन, दौहृद, रहोगत, निचृत्, लकुट, मारमोहित, निःशोक, सविद्युत्, वसुधिति, विलासिन्, लिखितर्, मच्छ, स्तम्भ्, अविघ्न, विवर, मनायु, संतनि, आस्थानी, वाज, धर्मिन्, यष्टि, समासञ्ज्, धनहर, एषिन्, समृद्धि, उत्तभित, यूथ, सुसाय, परिपूरक, छेदन, त्रिलोचन, सरोरुह, गुर्, नखाग्र, घोष, अनुवेष्टय्, दुरोण, द्विसहस्र, सरभस, मान्द्य, रुध्, कार्योपेक्षा, द्योतक, संग्राहक, व्यवधान, आनील, यमुना, शाला, यथाक्रम°, भ्रामक, प्रत्युक्ति, नचिर, प्रामञ्जनि, भ्रज्ज्, व्युपरम, शैघ्रय, धृष्णु, रिख्, प्रवच्, सैन्धवखिल्य, गोपावन्त्, रणाङ्गन, नियोगिन्, निमद, दशकुमारचरित, आशिष्ठ, विनियुज्, निरन्तर, उभय, अष्टरसाश्रय, सर्ज्, स्वालक्षण्य, कीकस, सर्पविद्, शितिपद्, रज्जु, देवसद्मन्, उपसंख्यान, सुदुस्तर, स्वर्ग-स्त्री, विद्यानुसेविन्, लज्जा, दरिद्रा, भाष, सर्पराज, नाश, पुनर्दारक्रिया, निरीहा, वि, सहस्रगु, पृषत, अनुसरण, नरवीर, निसर्ग, शरण, प्रव्राजक, तिलोदन, चित्रग, बलज, परोपकार, विकुक्षि, वरूथिनी, वास्तुविद्या, ल्+कार, हरदग्धमूर्ति, नियत, अदृढ, हृषीक, निरीक्षण, वेश्या, त्र्यर, आसदन, श्वेतच्छात्रिन्, यद्, कूर्म, सविकल्पक, स्पर्श्, परिज्ञा, पुरोभाग, विबोधित, उद्रङ्ग, क्षेप्तर्, श्वेत, प्रद्योत, श्रोणि, उत्पवन, सबर्दुघा, विनम्, विव्यथित, नभीत, निःसारण, लशुन, कुलान्वित, संसर्प, विमाथ, प्रत्याधान, स्थण्डिल, सर्पदष्ट, समांशक, पक्षपात, टांकार, दन्तान्तर, तुङ्ग, हविर्यज्ञ, तादृश, निर्विषय, कख्, बाहुवीर्य, संशा, अजिह्म, गुह्, उपेक्षण, कृ, अर्चिस्, नगनन्दिनी, चीरी, वेदविद्वस्, जीव्य, अनुकूलपरिणाम, धर्मन्, पातंग, अनहंकृत, अधस्तात्, मलपङ्क, बुभुक्षित, आचिख्यासोपमा, ऊर्ध्वगमन, स्तोकशस्, द्वैध, इह




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