प्रत्यृचम्

प्रत्यृचम्
प्रत्यृचम् /pratyṛcam/ adv. в каждой строфе, в каждом гимне




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सामाजिक, सूकर, काण्ड, राति, ब्रह्मावर्त, निघ्नता, °प्रदर्शिन्, परिस्तरण, उत्कल, भन्दन, प्रोच्चण्ड, कार्पासिका, उपल-प्रक्षिणी, जन-राज्, पितृतस्, श्लीपदप्रभव, बत, प्रणख, आरोपण, मेथि, विमहस्, नित्यदा, सुरसुन्दरी, गण, हस्ताहस्ति, क्षीनायुस्, करस्थ, अनियम, आनन्दमय, प्रत्युत्तर, ऋतावरी, ओजस्विन्, श्रद्धादेव, अवश्य, कारु, मार्जारक, अवकर, अश्वावन्त्, पारयिष्णु, अवस्थित, विष्टप्, मिष्ट, निकृष्ट, विस्तारिन्, लूता, उत्क्रमण, नामधा, उपपादन, पञ्चजन, जरदष्टि, प्रधर्ष्, पण्ड, वाल्क, वृत्, वामेतर, भल, स्वाप, पुरोनिःसरण, विद्योत, वेष, शफ, अप्त्य, निःश्रेयस, नक्षत्र, रूपभृत्, सम्यग्बोध, दुर्धर, वार्द्धुषि, विवर्तिन्, द्वंद्वभाव, नलिन, ऊषर, तृणेन्द, प्रस्रवण, दुर्मनस्ता, भूमिद, स्फुलिङ्गक, समानरूप, आश्रि, जात्यन्ध, वस्त्रान्त, दूडाश, रिक्तपाणि, त्र्यधिष्ठान, क्षी, सह, हण्डे, दार्श्य, वाग्विद्, स्पृश्य, अन्यत्व, विचिन्त्, लघुचित्त, निर्लुण्ठन, सर्वप्रीय, तृदिल, प्रबोध, राजोपसेविन्, °संहारिन्, वसन्तबन्धु, उद्गम्, हयद्व्षिअन्त्, उपकर्तर्, मन्त्रिन्, व्यवहृति, जलनिधि, नैधन, कश, निष्क्लेश, औदुम्बर, दुर्हणायु, पाटव, दशत्, परिष्कन्द, अनुभिद्, हर, चौरिका, निर्नाथता, उपादा, शतधा, कलियुग, शिरस्, नरेन्द्रत्व, सशोक, समुपे, परधन, चतुःशाल, सश्रीक, लिम्पि, हारिद्रत्व, अनुज्ञा, मिताशन, अतिप्रवृत्त, भूयस्, गकार, प्रदक्षिण, उपस्त्हान, अपभ्रष्ट, श्रुतबोध, प्रवेपिन्, असन, निद्रा, प्राध्व, कार, स्तनयित्नु, दोग्ध्री, महायज्ञ, सप्तवार्षिक, सशल्य, घनान्त, दुर्धित, सोदरी, ग्राम्य, सूर्यतेजस्, सिन, स्थूलता, अधर, तृभि, दोषतस्, द्रविणोद, संप्रदातर्, विनिःसर्, हस्तस्थ, फेन, दृति, श्वसित, °बन्धिन्, प्रात्ययिक, अदास, तदन्त, पाण, निशान्त, वियोग, गज्, जनता, स्वयंवर, प्रद्रव, आदा, सुसमृद्ध, सापत्न्यक, मूल्य, उपकण्ठ, हस्तिस्नान, ब्राह्मणब्रुव, दिश्, कर्ष, विकिरण, मत्स्यबन्ध, प्रसु, दृष्ट्वा, विधा, सौकृत्य, पूजा, सिद्धाश्रम, प्रभास, क्षीरप, धनुर्धर, अग्निदग्ध, रा, स्पृहावन्त्, गीथा, क्षि, पिचु, दीप्ताक्ष, प्राञ्च्, दुर्गन्धि, सम्यक्पातन
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