बलचक्र

बलचक्र
बलचक्र /bala-cakra/ n. господство, власть




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परिग्रहण, अग्नायी, वञ्चनवन्त्, श्मश्रुधर, सप्तचत्वारिंशत्, संरुच्, गृहदाह, ग्लह, कृष्णवाल, उपयुज्य, कृष्णवर्त्मन्, पदश्रेणि, सुज्ञान, अनुकर, कृष्णवर्ण, नाभि, काकली, रङ्क, त्रपु, अवम, अनुबाध्, चमत्करण, अदान, संलाप, भूमीरुह्, कृष्णभूम, कृष्णसार, पितर्, लेप, मूर्छा, अशस्, प्रतिकूलवर्तिन, व्लेष्क, दक्षु, अशक्ति, आशङ्का, विमोक्षण, शैख, विजेतर्, कृष्णपक्ष, पुट्, दित्यौही, कृशाङ्गी, संश्लिष्, उन्मुलन, प्रायोपवेशन, वसुधिति, आरे, आव्रज्, वृत्रहन्, अनामुक्त, उत्सर्, कृष्णनेत्र, हीनरोमन्, द्विहायन, अहंकार, पापमति, पृथुजघन, नविष्टि, समञ्जस, एङ्, वारह, हविष्कृत्, काठक, निर्वीर्य, शिफा, दुष्करकर्मकारिन्, तन्वी, गर्वगिर्, सुजन, सर्वथा, परश्वध, बृंहित, वंशधर, ताम्बूल, विकल्प्, संवत्, अंसल, षाण्मासिक, भुववेष्ट, चेटी, कृष्णा, स्नातक, उपसर्ज्, प्रक्षेप, संतोष, बलभृत्, विसृष्ट, विगत, त्रिदिवौकस्, स्तुप, प्रवचन, लोकवृत्त, घटना, और्वी, द्वित्व, पिण्डिका, विजाति, अनुगर्, प्राण, एकधा, अकृतबुद्धि, चाञ्चल्य, संज्वलन, प्रस्थापय्, उष्णकर, पुरश्चरण, ब्रह्मलोक, नेदिष्ठ, विपक्षीय, धनुर्भृत्, कृताकृत, प्रेमाकर, देवविश्, भाषिक, पुर्, दारु, अशनायवन्त्, भरुज, शरण, दुर्भूत, प्रव्यध्, सूक्तवाक, भट्टनारायण, ग्रामीण, गोमायु, दिधिषु, गोयान, प्रवेक, आत्मनातृतीय, पुनर्गमन, पादपङ्क्ति, आक्षिप्तिका, भानवीय, रोद, समूहन, संवर्त, प्रशंसोपमा, मौखर्य, पीताम्बर, विचेष्टन, शाक्यमुनि, वेष्ट, लाङ्गल, वित्रस्त, परिसाध्य्, चतुःशत, उरूणस, वषट्, बहुपाद, दिव्यदर्शिन्, देवयजन, वेताल, रुवण्य, प्रलघु, सैन्य, प्रधा, सौकर, सिध्म, राहु, विभाव्य, विली, निकुब्ज, दुःखयोग, द्वैध, खेलि, यमज, तुला, अपारयन्त्, स्फुटीत, कुक्कुट, जैत्र, धरणीरूह, अप्रतिमेय, दृष्टान्त, भैषज्य, परिशेष, परिमण्डल, विप्रकार, सिक्थ, बल, संशुद्धि, भयेडक, सुरर्षि, दारक, सद्विद्या, आलम्भ, संस्मर्, अतिलोहित, अतिसर्ग, प्रसङ्गिन्, हितकाम, सहस्रवाज, अत्यन्त, भाणक, शुष्कत्व, प्रवाहिन्, सू, परपुष्ट, मूर्खता, वर्तर्, द्विवर्ष, विद्राविन्, न्यूनय, विनयिन्, प्रतिपालिन्, दर्वी
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