अवगुह्

अवगुह्
अवगुह् /avaguh/ (формы см. गुह् I) прятать; скрывать




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यमजात, अपदिश्, विधन, अमा, भुवनत्रय, ओदन, एकजात, आभीक्ष्ण्य, कपि, हेरम्बजननी, तुलायष्टि, श्रावण, दर्ह्, उपसेव्, आरिफ्, वायु, संहु, समानजाति, हिम्य, भ्रातृदत्त, कुलदेवता, विलभ्, सार्वकामिक, दून, संघ, विघात, शाखाङ्ग, अचेष्ट, दण्डपात, द्वार्, भावसखनित, आनुपूर्व्य, नमस्य, संक्षय, प्रज्ञासहाय, उदयन, द्रोण, निर्मातर्, डाकिनी, भण्, सप्रजस्, हरिनेत्र, निर्ममत्व, तपस्, अमुतस्, दोधत्, शठता, प्रकम्प, उरंगम, उत्तप्, व्याचक्ष्, अवतार, मृधभू, अतिरम्य, वर्धन, सुबल, पाञ्चजन्य, काण्डिन्, अनिर्जित, नागशत, स्वार्जित, शतपुत्रता, उलूप, पिच्छ, उत्प्रेक्षण, पङ्क्ति, क्षैत, सधमद्, कुल्य, अशिव, सर्वरात्र, महावसु, अन्, अचलन, विद्वेषण, तात्य, भैक्षान्न, निषेव, शाप, पुरोवात, द्वैपायन, मण्डल, त्रिषाहस्र, सामाजिक, रक्ष्, वृक्षदेवता, कलाविद्, अभूति, प्राप्तापराध, बभ्रू, अन्तिक, हरस्विन्, प्रकरण, एकदेश, उपसमाधा, परिवर्, तिग्मेषु, देवतात्, माल्यवन्त्, वंश्य, पक्व, पचेलिम, सुष्टु, सारवन्त्, आवर्, विवर, साकम्, महागद, अनिष्ट, भ्रान्तिमन्त्, अतिरमणीय, स्वर्यात, याचिष्णुता, उद्वेष्ट्, उपमाव्यतिरेक, माध्वीक, कुलतन्तु, संवा, दिविर, वैश्य, हिरण्यपात्र, संवल्ग्, ध्या, बहुल, ईश्वरप्रणिधान, पञ्चशत, शाल्यन्न, ग्रन्थ्, कर्णपथ, ऐन्दव, संविद्य, प्रभर्मन्, शीभम्, आयोधन, कल्प्, निज, दुष्टि, सद्विद्य, त्वादूत, सायन्तन, प्रत्यवमर्श, पादान्त, दुश्चित्त, मनुज, संनथ, निःस्वन, पिष्टातक, लुबन्त, नाभिजात, वियोजन, अद्रोह, प्रास, अवपश्, हरण, समुदाहर्, तोयराशि, दीर्घतीक्ष्णमुख, संगिर्, मुरज, प्रधान, दिवाकीर्ति, काष्ठभृत्, विस्फूर्जित, सिराल, वहन, सहभोजन, सुरधनुस्, विरोचन, परिवृत, प्रसभम्, काञ्चनप्रभ, लोकहित, भूतल, पतग, नु, अविवेनन्त्, मणिरत्न, परिसंख्या, हस्तगत, प्रव्राजक, संजल्प, संशम्, सरसी, नेजक, सत्त्व, प्रियालापिन्, ऊर्ध्वकर, ध्यानतत्पुर, प्रभु, शर्यणावन्त्, सुदुस्तर, उष्णिह्, तटाकिनी, द्वरि, स्वस्ति, चयन, प्रतिसंधा, तति, कुम्भिल, उष्णग, स्थली, परिमोहिन्, ग्लह्, मदालस, इध्, क्रमप्राप्त, दुःस्थित
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