उल्लिख्

उल्लिख्
उल्लिख् /ullikh/ (формы см. लिख् )
1) бороздить
2) морщить
3) царапать
4) гладить, разглаживать
5) лощить




Случайная выборка слов

संवनय्, देवय, सप्तविंश, तोयधि, लभ्, वारिबिन्दु, निनशिष, अनुमुद्, मीनकेतु, आख्येय, क्षीव, नीडक, स्थविमन्, जन्तु, विदल, धनू, वीध्र, संतर्पण, फेन, नृषदन, प्रव्राजिका, सृति, प्रतिक्रिया, सुसंपिष्ट, स्थूणा, हर्मुट, समुपलभ्, प्रकाशक, पापक, उत्तरपक्ष, चापयष्टि, चण्डीष्टोत्र, उद्घातिन्, देवपति, संकट, अवि, पैप्पल, भुजग, विरोपण, विदर्भ, शवधर, आत्मता, निस्तरण, शीतकर, , ब्रह्मकृति, विजावन्, नैषधचरित, विस्रंसय्, तव, माहिष्मति, वव्रि, उदारत्व, जयघोषणा, अतितारिन्, नदीपति, हंसकूट, विशुद्ध, सांयुग-कु, महाभाष्य, व्यादेश, समीहा, प्राणान्त, रेषण, लट्, संनियोग, धृतराष्ट्र, धनागम, निराशिन्, वाट्, शिखा, अकथित, जू, नरराज, काचर, प्रहार, रजनीचर, ताण्ड्य, श्रयण, अभिभू, प्रदह्, भृतक, वैतरणी, स्फिर, निघण्ट, ब्रह्मदेय, विप्, असाधक, रद्धर्, सुधृष्टम, मन्त्रय्, अमात्य, वग्वन, सुरस, चारुलोचन, गृहदाह, दर्शयितर्, गोरस, यज्यु, , कामिता, माणविका, अर्च्, प्राप्, सामग्री, अपस्मर्, सेदि, द्विष्, दुर्मरण, निर्बुद्धि, सागरपर्यन्त, अनुकम्प्, रुद्राणी, क्षेपणी, वेणु, सुब्रह्मन्, रक्षोहत्य, निधिपाल, ब्रह्माद्य, कुरङ्गलोचना, संबाध, प्रच्यु, त्रिलिङ्ग, जयेश्वर, तरुगहन, शक्वर, प्रद्रव, लोह, परिलधुता, क+ण, सार, नर्दन, वसुधाधिप, वृति, लेश्य, शम्बूक, भक्तिमन्त्, विवेकित्व, क्षत्रिय, ओम्, क्षारलवण, स्म, अतिगा, अभिमर्द्, सुकेत, शक्तिमन्त्, निर्वात, हसन, कुचेल, दुःखवेग, विलोभन, आकाशग, दम्भोलिपात, आपस्, अभिविख्य, अपरुध्, मृत्°, परीक्षक, शठ्, विश्वसौभग, मित्रसंप्राप्ति, संश्रवण, त्रिदिवेश्वर, प्रतिसंवद्, अतिसंचय, दाश, अस्ता, मृताङ्ग, इद्, विधि, वश्, भामिनी, निहा, हस्त, दर्तर्, कुम्भिल, चञ्चु, अबुद्धिमन्त्, उग्रत्व, साधक, अतिदुर्वृत्त, , शार्ङ्गपाणि, सूर्योदय, पश्चिमाचल, स्फुलिङ्ग, ससत्त्व, रोद्धर्, पङ्गुता, या, क्रोष्टुक, वैदर्भ, स्त्रीपुंस, षड्विंश, परीशेष, वत, उदय, पितु, समुत्पद्, नौकर्मन्, दुघ, कटि, दृश्यत्व, विरुह्, आरण्यक, न्यास, शीर
сборка мебели, литовский словарь




    Яндекс.Метрика
    словарь санскрита 2009-2012 ©LingvoKit