घनान्त

घनान्त
घनान्त /ghanānta/ (/ghana + anta/) m. см. घनात्यय




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प्रतीनाह, खनित्र, अदन्त्य, शिरोमणि, दिधक्षू, बलाहक, सुमङ्गल, शेषा, पालक, भासुर, पर्यवेक्ष्, खेचर, अत्युल्लस्, आश्रयण, द्योतनि, प्रहरण, शरीर, पुस्तपाल, दुर्मनस्कत्व, पथे, दिगम्बरत्व, स्वाराज्य, अत्क, निशाम, वसन्त, गुडौदन, निर्माय, सुचक्षूस्, अङ्गीकार, हस्तगामिन्, उत्कल्, उपाव्, उपरमण, वेणी, प्रजा, ब्रह्माद्य, आडम्बर, द्विरात्र, उच्छित्ति, प्रतिनिर्यातन, सहस्रगुण, आप्, मिथु, कटाक्ष, वैमात्र, मैरेय, निर्वक्तव्य, पपि, ज्वलित, मध्वाशिन्, पल्पूलन, श्रद्धावन्त्, यमसदन, नभ्, अत्र, शुचि, पर्युषित, शश्वधा, वासवदिश्, अमा, मत्स्यबन्ध, एकानर्थ, प्रमिष्, संहर्, इषुधि, अरुन्धती, प्रसन्न, विंशतितम, समांश, सवासिन्, सौमिल्ल, वारमुख्य, दृष्टिगोचर, स्मिट्, सत्त्वस्थ, त्वाम्, तदीय, संजनन, आभुज्, द्रुमाय, दुराचार, निर्विशङ्क, जालमाला, धर्माधिकारिन्, जायु, मर्ध्, निरीक्ष्य, सहस्रसनि, टार, निरामय, कार्यवृत्तान्त, लोपिन्, नीकाश, शास्, एकच्छत्त्र, लोकोक्ति, शकुन, तुल्यार्थ, आमर्श, निर्वसु, क्षत्रिय, उमा, परिक्षाम, सप्रश्रयम्, दुर्हित, विकम्पिन्, तव, पुस्तक, आसर्प्, सायुज्यत्व, शान्तमनस्, संमाननीय, संज्वलन, नटन, प्राछ्, संध्याबलि, निर्भिद्, श्रावक, शिरोदामन्, राजवन्त्, राम, अविनय, पर्षद्, अनमीव, दैवज्ञ, सर्वत्व, निर्व्यापार, कुट्, मनावी, स्थावरजङ्गम, सलिलनिधि, परिश्रु, °वृन्तक, असुर्य, कपर्दिन्, सत्यशील, निशाटन, वाल, विचिन्त्, कलहवन्त्, त्रैवेदिक, दिदित्सु, दानवन्त्, स्फुर, त्रिदशारि, प्रत्यक्ष, अशुभ, प्रतिश्रुति, संवत्सरसहस्र, पद्, संनिवेश, पक्षधर, भरतवाक्य, नृतू, सप्तर्षि, अनाथ, विदग्धता, सुधाद्रव, संस्तु, पुंसवन, समित, दशग्व, परिवस्त्रा, निरोध, शूद्रक, विघ्नजित्, दरिद्र, कुत्र, भ्रशीयंस्, मोक्तर्, काकी, वृजनी, आपूर्णमण्डल, दृष्टश्रुत, निह्नुति, मेलक, निर्वम्, रतिकर, नाडी, व्रीहिन्, मृन्मय, आचरन, रसरत्नहार, तिर्यग्ग, पृथुशिरस्, भागिन्, देहकर, सादन, अदोष, रेखान्यास, नृत्, उपपादन, कन्यका, वास्तव, तित्तिरि, रशना, निबुध्, जिह्म, बोधि, पूर्वोत्तर, डमरु, अपकर्ष्, सोत्सव, अनिर्वेद, राजपुरुष, दुवस्वन्त्, स्रस्तर
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