संवर्ग

संवर्ग
संवर्ग /saṁvarga/
1. поспешно собирающий что-л.
2. m. поспешное собирание чего-л.




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प्रतिकर्, शुभ्रदन्त, निष्परामर्श, प्रद्योत, लिट्, पुरुधा, निर्लोभ, पुत्रिका, प्रमाद, सुप्रिय, दुष्प्रयुक्त, पन्था, श्रान्त, भिद्य, योध, पौराग्रगण्य, शाकिन्, परिहृति, शुठ्, तुलन, कङ्कट, सयावन्, भुजयष्टि, सुतप्त, अञ्ज्, वेत्रासन, सरघ्, प्रतिसंधि, द्विपद, वार्षिक्य, दर्श्, स्वपस्, आदित्यवत्, प्रवर्ग्य, प्रहित, व्याग्रचर्मन्, संग्राहिन्, बलिकर्मन्, शृतत्व, पत्ति, सुदारुण, प्रतिजन्मन्, पार्श्व, विप्रलम्भशृङ्गार, किरीट, मिश्री भू, विस्मापन, ईश्, सुखघात्य, प्रशंसक, वचस्, दिविगत, परिया, फकार, सर्वसह, विकृत, दाद, संकेतक, गृहमेधिन्, धर्मिन्, तरंगिन्, निर्घृणत्व, अप्रजस्य, शतपथब्राह्मण, शंसथ, एकदा, प्रव्यध्, दधृष्वणि, गौड, निर्वाहण, स्नेह, दशकण्ठ, पटल, संभुज्, द्रप्सवन्त्, मर्द, अपूप, पराचैस्, यत्न, कुम्भक, नगरोपान्त, पुरोमारुत, अष्टचत्वारिंशत्, रात्रिक, विश्वजित्, ऋक्वन्, निमिष, शुष्मवन्त्, अक्षित, दीन, पुनःसंभव, समना, सुदुस्तर, अवधर्, जयश्री, पञ्चपद, शान्त, तिरो°, नैरन्तर्य, त्रिपथ, शष्पवन्त्, निर्वश, परिवित्ति, द्विगुण, दर्पण, हर्षुल, लोहाष्ठीला, मल, भल्ल, स्वङ्ग, युगान्त, दोषाय, पुनरुक्ति, अनियम, प्रपौत्त, ध्यानवन्त्, भस्मसात्, उपायोपेय, दुर्ग्रह, पञ्चांश, उत्प्रेक्षा, परिगृहीति, प्राणार्थिन्, प्रफुल्ल, ओदती, पालक, वैमूल्य, नारिकेल, दंसना, केदार, महावीर्य, पणि, आमन्त्रित, आमाद्, प्रतिद्वन्द्विन्, असमर्थ, चैलधाव, यमसदन, युगपद्, विवृति, चिति, संपन्न, नीकार, अधिवासन, चमत्कृति, कूटस्थ, संहत्, सलिलधर, वर्ष्मन्, माया-योग, क्रियाकुल, समालाप, मन्त्रवाद, धनसाति, चाट, दूरालोक, भद्र-काली, पद्मभव, पारिजात, प्रव्यथ्, पोत, धासि, और्ध्वदेहिक, तल्प, रुण्ड, सार्थिक, वामनी, प्रसुप्त, मरीमृश, निष्पुरुष, स्थावरता, अतिवद्, प्रत्युद्गति, शिखर, तनीयंस्, पण्, उद्यानपाल, दुः°, प्रच्छद्, ईश्वरत्व, अन्यतर, वीध्र, दीर्घकर्ण, पतंगराज, उपजीवन, प्रलपन, घसि, देवीभवन, सुविद्वस्, जैमिनि, दैत्यान्तक, प्रवच्, नस्य, प्राणनाश, व्यतिरिच्, निरयण, विनीति, विमहन्त्, स्तनपान, उदयगिरि, सहस्त, उत्तर्, नगाधिप, मृत्पिण्ड, मस्करिन्, हरिणक, संविज्
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