सर्वभूतकृत्

सर्वभूतकृत्
सर्वभूतकृत् /sarvabhūta-kṛt/ создающий все существа

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सिद्धि, परादा, वपुष्मन्त्, दायाद, स्रंस्, अजामि, विश्वसनीय, पद्मराग, अपभाषन, कर्त, आस्वाद्य, तात्, व्रन्दिन्, द्विज, परिज्ञप्ति, निर्भाग्य, दिदृक्षेण्य, शिरोरुजा, खण्डन, भोगिन्, दासता, याज्ञिय, समुपज्ञा, अभ्युष्, संकल्पजन्मन्, सायंकालिक, बरासी, ध्वसिर, नीकार, परिलुठ्, सोत्साह, सोमांशु, प्रभा, समश्नुव, महागण, नामथा, तुषारकर, पण्, सौवर, उदय, सज्जन, स्थविर, दुर्ज्ञेय, पुलस्त्य, मान्द्य, श्वमांस, नृ, समर्य, वत्सप, सहायवन्त्, वेहत्, सुकृतकर्मन्, ब्रह्मचर्याश्रम, संहत, असंशय, विध्, प्रवेश्य, सायंकाल, प्रविषय, उपसंग्रभ्, दीर्घायु, छत्त्रधार, भूमिभुज्, जनप्रवाद, बीजिन्, प्रच्छन्न, अक्षरच्छन्दस्, प्रणपात्, जागरित, शीर्ति, योग्य, अवलम्ब्, सुर, अप्रजस्, प्रतिरोधन, चरथ, अण्ड, आत्मसंतान, संजनन, अपरी, नीरन्ध्र, तक्ष्, उपगा, दान, तडित्वन्त्, घृणालु, चतुस्त्रिंश, महीतल, दायादबन्धव, दमनक, परिचारिका, भावन, विलोभन, सहत्व, अगति, समर्पण, परिम्ला, एकवीर, विनोदिन्, ऐरावण, देववध, मृदङ्ग, हरितच्छद, धुर, वच्, प्रतिमुकुल°, आविद्वंस्, पवित्रवन्त्, विलुण्ठन, वैपञ्चमिक, क्रोश, चूष्, सा, असंभव, निर्गुण, उपश्रि, सारङ्गलोचना, मूषक, सौभ, कुञ्चि, परिपार्श्व, दोषाक्षर, महोदधि, धूमानुबन्ध, धरुण, प्रत्यरि, मूर्ण, कुवलयदृश्, उत्तरधर, धनुष्मन्त्, श्वाविध्, उपहर्तर्, चारुदेष्ण, नावनीत, पण्डक, पतिव्रता, उन्मनस्कता, कैतव, प्रावर्, पूर्ण, स्वर्गकाम, संमर्शन, अव्यवधान, अतिनिष्ठुर, न्यायतस्, ईरिण, त्वम्, विपत्ति, व्यञ्जन, पूर्वराग, संकम्प्, शिफा, न्यर्बुद, श्यावाक्ष, आटोप, दभ्र, युष्मावन्त्, व्रत्य, मारय्, अतिक्रमण, उरूची, अल्पज्ञत्व, आस्तार, सम्राज्, कम्पन, निरंशु, ग्रीव, निर्वा, उड्डामर, अरुस्, द्रवत्व, नैक, शूकर, मरुत्सहाय, संभूति, उपयोग, दुरात्मता, आलोकिन्, जातिसंपन्न, निद्, विधर्षय्, उद्धू, सेक्, वारङ्ग, निष्कास, पञ्चत्रिंशत्, स्मृतिमन्त्, नियमस्थिति, वितयन, कू, ऋक्व, अध्रुव, सुवदन, प्राग्जन्मन्, ददाति, आयुध, जलार्द्र, अनुविराज्, कुरङ्गलोचना, धनंजय, देवीस्तोत्र, द्राघिष्ठ, सुत्रात, वैकल्य, संदूषण, मृगीदृश्, ग्रामघात







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