रोमहर्षण

रोमहर्षण
रोमहर्षण /roma-harṣaṇa/
1. вызывающий волнение
2. m. nom. pr. ученик Вьясы; см. व्यास 5)




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बृहत्त्व, प्रसह्, निर्वृति, फलता, सुकर, असम, प्रमातर्, स्तिमित, प्रतिषेधात्मक, सदृशक्षम, अनवद्य, रोमन्, प्रद्योत, रघुया, अध्वन्, तानि, घनपदवी, सुनय, सुसखि, पुण्डरीक, हस्तबिम्ब, शाङ्खायन, दत्त, ताण्ड्य, सरसिज, अनृजु, ऐष्टक, मतवन्त्, गहन, प्रच्छद्, हालिक, त्यद्, रविकिरण, शकुन, दिग्गज, कवल, यह्वन्त्, संपद्, महस्, वृद्धवयस्, अनसूया, नवयौवन, सनद्रयि, त्रिंश, गतजीवित, श्रुति, ऋते, विप्रश्निक, निकामतस्, पिधान, पञ्चसप्तति, समुत्क, अनुसृत, संतुष्टि, प्रत्याख्या, विष्टार, प्रवहणभङ्ग, आविष्कार, नक्र, नक्षत्रनेमि, साहस्रशस्, लोकज्ञता, नाशन, दब्ध, अपरवक्त्र, दुर्या, मृदुवाच्, मन्, रसितर्, आस्फोट्य्, परिकीर्तन, दत्तशुल्का, उल्लेख, नाराच, यावतिथ, वाजसनि, जाम्बूनद, तत्त्वाख्यानोपमा, चित्रकर्मन्, सगुण, पुराजा, दिनकर्तव्य, सारणा, लवन, प्राच्य, हि, संसङ्गिन्, भूमन्, विष, भाम, रक्तत्व, होत्रक, चोद, निकर्, लाङ्गलिन्, जनी, धू, नामचौर, समाप्तिक, दिनकर्तर्, विश्वासिक, मुण्डकोपनिषद्, स्रुव, मरीमृश, अलस, संवह्, अभिगर्, पञ्चभूत, अञ्चल, आविष्करण, प्रतिरोधक, वसुदेव, सान्द्र, अन्तरा, गाथ, कोष, दिनकार्य, प्रलम्ब, प्रतिजन्य, निष्पदय्, उदहार, प्रव्रज्, याज्ञवल्क्यस्मृति, हस्तिपाल, वेष्टन, दृष्टिक्षम, ह्रदिनी, चमूपति, लोककर्तर्, उत्तरात्, पूर्वत्व, दिनकर, सद्गुण, सुख्य, संनस्, हारफल, ईरिण, विष्णु, अभिसार, विनिर्गत, स्पृहा, कर्णपूर, एकान्ततस्, आहर, प्रस्पन्द्, हृदयज्ञ, वियोगिन्, अतिनृशंस, स्तेन्, एकानर्थ, रत्नमाला, आविश्, सप्ताह, चटक, सिसृक्षा, विशसन, प्रायणीय, शेष, अक्षेत्रिन्, शणतान्तव, प्रीतिसंगति, निरुषित, मातुलेयी, तोयद, संप्रदा, सहस्रभृष्टि, अमार्जित, वित्ति, शास्त्र, हव्य, नड, सूचना, प्रसक्ति, संसर्पण, तप, अपकर्ष, शृतत्व, वेश, मन्त्रण, आपि, धर्मसंज्ञा, क्षोदस्, त्रिविक्रम, कम्पन, दण्ड्य, क्ष्माभर्तर्, संदानित, ऊर्ध्वगमनवन्त्, सोममद, समित, मैनाल, अभीक, अतिप्रवृद्ध, वलयिन्, अकृतज्ञ, समस्, जिजीषु, अवसर्पण, स्वादन, गुणहीन, एण, वीतभय, जगतीतल, सामान्यतस्, पटीक्षेप, क्रमागत, रजनिकर
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