प्रकर्षण

प्रकर्षण
प्रकर्षण /prakarṣaṇa/
1. m.
1) мучитель
2) нарушитель
2. n.
1) отведение (войск)
2) растягивание
3) длительность, продолжительность




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आहनस्, आयुध, संक्लेद, नदीतट, नरकान्तक, मन्द्र, कच्छ-प, दूरसंस्थ, मीन, वृक्षौकस्, अदन, प्रियहित, अवतन्, साहस्रक, मधभाग, रक्तवासिन्, मुखर, अमरेश, श्यामी भू, वैमात्र, लक्ष्मन्, आशङ्क्, बुक्का, स्यन्दन, कुहक, संब्रू, अशुद्धि, बाहुयुद्ध, पम्पा, उरुगाय, पर, दुष्टान्तरात्मन्, वेदिका, रोच, ल्यप्, प्ररुज्, अद्यतनी, तन्, समूहन, परिपूर्ति, संभुज्, उचथ्य, गुप्ति, °र, अङ्गुरि, अपकर्, प्रज्ञामात्रा, अष्ट, गर्भगत, वृक, विरक्ति, प्रतिसंधा, निःशेष, प्रवर्धक, नागरता, परिसर्प्, दण्डाधिपति, हव, मुखचन्द्र, अबुद्धिमन्त्, लप्, गर्भगृह, कलज, पुरोरथ, सदो°, यौध, अप्सरस्, नित्यमय, लिश्, स्वपन, अभिशप्, असितपीतक, 4अप्रतिरूप, पीन, कोण, वापुष, मोह, क्षत, संतुल्, वारिधि, द्रव्याश्रित, नारिकेर, कत्थन, घूर्णना, समाश्वस्, प्रमृड, विभा, दूरगत, भीम, द्विपद, शिष्, भग्न, घर्म, वचन, सपक्षता, क्रियायोग्य, अन्यथाप्रथा, दौरित, प्रलप्, अभ्यास्, तपनी, रूपसंपन्न, ह्ये, धोरणी, कूर्द, पञ्चत्रिंशत्, परिक्री, जलराशि, पौरिक, विश्वपा, घृतनिर्णिज्, सनिश्वासम्, लोक्, संस्कृत, बन्दीकृत, समभिपद्, संसर्प्, महर्द्धिन्, सभार्य, निरि, मनोलौल्य, शाल्, दिनाधिनाथ, विषजिह्व, लाट, प्रलेप, वित्रास, स्वस्रीय, उषर्बुध्, नीरोग, संमद्, मुक्ति, वायु, वर्ष्या, गीत, समद, सुखोषित, आगति, व्यवस्था, दम्भोलिपात, अमी, संविधान, पांसु, यज्ञक्रतु, निखन्, उपन्यस्, हिमागम, अवछिन्न, मञ्जरी, श्रिष्, स्वपक्ष, पापाचार, प्रेर्, दिनार्ध, वित्ति, निन्द्, कृशन, क्रन्दन, विस्मयनीय, दूरेभा, वारणावत, शौद्र, सहनीय, आव्यथा, वि°, घर्, दुरक्ष, गर्भगेह, जिहीर्ष्, सहस्रदक्षिण, च्युति, आयतेक्षण, अभिनय, कीलक, अर्थ-बन्ध, सुत्रात्र, निःष्पन्द, रुक्ष, सुकान्त, सीमावाद, द्वासप्तति, निर्बीज, स्कद्, मायु, सूनृता, दीर्घतीक्ष्णमुख, विन्यास, परमार्थतस्, यस्मात्, वर्षाकाल, प्रभाकर, अवसर्पण, अयस्, त्रिवर्ष, वायव, किल्बिष, ध्वर्, संगीतक, महोत्साह, प्रशर्ध, धातु, सान्द्रस्पर्श, उत्तरापथ, चम्पकवती, अभिभव, नैर्गन्ध्य, भद्रकृत्




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