जूर्व्

जूर्व्
जूर्व् /jūrv/ (P. pr. /jūrvati/ — I)
1) истреблять огнём
2) опалять; сжигать




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अधिषवण, अर्थिता, परिग्रह, वधूजन, पूर्णता, दिक्पति, आश, रसान्तर, आत्मनेपद, निस्पर्श्, उल्का, प्रतिनिष्ठ, त्रिकृत्वस्, माहेन्द्र, तिलसर्षप, राजस्व, धृष्टद्युम्न, सुदुःसह, आभू, माधुरी, त्वा, गूढजीव, निरपत्य, आयान, अर्भक, विग्रथ्, भ्रामिर, डम्ब्, षडर्च, मुनिवर, कुक्कुट, अपतिका, बहुगुण, गोहन्तर्, क्षिप्, प्रसक्त, भूतपूर्व, धार्य, क्षोभ, क्षम्, आवर्, शील, ईक्ष्, पयोवाह, तालावचर, उत्पादय्, ऊकार, नियोजन, नरेश, त्र्यङ्ग, चकोरव्रत, आविद्वंस्, रुशती, निर्वासन, मनोतर्, परिकल्, महेश्वर, नगरस्वामिन्, गमनीय, आसात्, मन्थ्, कुबेर, सर्वज्ञातर्, क्षितिभृत्, प्राणयात्रा, नीचक, अर्चिष्मन्त्, उपसर्ग, रथकार, हित, अध्यवसान, राजपूरुष, अभिप्रदर्, स्खलित, ह्रसीयंस्, हेमव्याकरण, क्षेपिष्ठ, नवभाग, ज्ञातिमन्त्, अनुभव, निर्विशेषता, उपसर्प्, गृहस्थ, दान्त, विद्युन्मालिन्, पादिक, वैक्लव्य, संशोषण, चेतु, दान, विश्रुति, खल, मेदिनीश, अभिद्रुह्, संज्वलन, गीथा, देशीय, महामनुष्य, जविन्, परिभू, अभ्यायम्, त्रैविष्टप, सिताभ्र, रथवर्त्मन्, परिव्राज्, दशकण्ठ, धान्य, कशीका, शस्त्रिन्, कृच्छ्र, करुण, वृकला, नरराज्य, तपस्विजन, संतार, हाव, संज्ञान, नि, संवानय्, क्षिप्र, विस्तारिन्, भल्ल, भविष्यपुराण, रभस्, प्राचीन, आरात्, समुत्सर्ग, दुष्प्रयुक्त, , पद्मभू, ईर्ष्या, तापक, हंसपादी, प्रभञ्जन, प्रदर्शय्, प्राणवृत्ति, विवद्, राजगृह, दानशील, पट्टक, अनुदात्त, अर्पण, सुनिभृतम्, अजीर्ण, महार्ह, कर्मकृत्, दुर्मन्मन्, रुण्ड, उपक्रुश्, वामन, स्वत्व, न्यर्थ, पावन, संवर्णन, विष्ठित, सस्मित, यज्वन्, द्रावयत्सख, भारद्वाज, आहर्तर्, सहस्रद, दुर्विद्य, वरतनु, कलहंस, अतिवर्तिन्, राध, कच्छ, संभव, राशि, उद्विज्, शीत-रोचिस्, संस्था, वप्, मृक्षिणी, गृहार्थ, संनिधा, हृदयसंनिहित, क्षिति, गुणकर्मन्, साविनी, स्वादिष्ठ, नग्ना, रणाङ्गण, सजन्य, शाठ्य, स्वैर, दीर्घरोषता, शतबलि, श्रवणकातरता, आयुध्, उपस्तर्, शूरसेन, विभेद, उष्णदीधिति, हास्तिनपुर, देवगवी, स्वेच्छा, धावल्य, हंसी, वर्तनार्थिन्, योगिन्, तत्सम, पौरुषेयत्व, °वेशिन्, उद्भव, संघर्ष्, प्रमय




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