भर्तर्

भर्तर्
भर्तर् /bhartar/ m.
1) носитель чего-л.
2) воспитатель
3) господин, повелитель
4) супруг, муж




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औशीनर, धनुष्पाणि, भानुमन्त्, प्रश्रयवन्त्, प्रबध्, तैमिरिक, सर्वार्थसाधक, अभिधर्म, देवहित, शिशु, क्षेम, मरक, द्वैतवाद, सादृश्य, अनभिशु, महारथ्या, तपान्त, गोमन्त्, समुपोह, षट्पञ्चाशत्, पुनःपाक, उदक्, महीपाल, वेश, शितिमांस, निर्बीज, चारिन्, मृद्वीका, संधुक्ष्, विशारद, भल्ली, आलिङ्गन, यजत्र, दन्तमांस, प्रसर, सुषिरता, द्विविधा, ऋक्षराज, धर्मशील, रुषा, पयस्, एकपत्नी, प्रयोगिन्, निरघ, त्रिपद्, निर्लुण्ठन, त्रिलोचन, तर्जित, सवन, महिमय, बलदावन्, रश्मि, परिवृत, अप°, नगेन्द्र, इमाम्, ह्रसीयंस्, रथोद्धत, सकल, दोषारमण, असनाम, कृतकार्य, दुन्दुभ, श्रोत्रपेय, विमहस्, ष°, निदाघकर, पस्त्या, उपायन, तद्वत्, तद्विध, कदर्थना, ह्रेष्, निर्विकल्प, प्रतिथि, समुक्षण, संशोषण, पृथुता, वस्मन्, तूष्णींभाव, स्वधावन्, तुष्, स्मील्, वेदव्यास, रिपु, शठ्, रथ, चतुर्युक्त, निरस्, , विस्मय, उद्धर्, महानसी, आयुध्, उन्न, परावह, मारुक, सोमप, ध्वनि, तनू, अनुयाच्, सुसंस्कृत, भुज्, प्रथ्, प्रोल्लस्, ईश्वर, द्वाविंशति, भियस्, लुब्धक, प्रभामण्डल, रुध्, कोटक, अभिविमर्ज्, अश्रोत्र, बोधि, असुस्थ, जीविताशा, सि, विदरण, हारावली, दुष्प्रसह, विनति, गविष्, भ्रमि, उदात्त, रसलेह, बन्धक, व्रतचारिन्, मेद्य, अतिसंनिधान, उपजुष्, प्रयम्, नाशिन्, द्वैत, किल्, ह्लाद्, असृज्, श्वेतवाह, दुर्गन्धता, परावल्ग्, सामवायिक, हिङ्, सस्य, अभिलभ्, शलाका, प्रतिभास, धनकेलि, प्लेङ्ख, सपर्या, विप्रवस्, विशाखदत्त, नीरुज्, तद्भव, सत्यवादित्व, निस्तमस्क, शतशृङ्ग, अप्रामाण्य, छेद, दीर्घकर्ण, अर्धरात्र, परिनाभि, स्तम्भक, अनपराद्ध, समाभाषण, अप्नस्, कृष्णी, भुक्तपूर्विन्, निक्रमण, रुक्मन्त्, यशस्काम, स्तिप्, स्थलनलिनी, शाखाभेद, °वर्जिन्, युध्म, दारुणता, अभिगर्ज्, मौर्वी, गर्, वृक्ष, घर्मवन्त्, विधर्मन्, इर्य, विषचूर्ण, आचर्, दुर्भग, परिमन्थर, परास्, दशदिश्, संतर्प्, परिनिर्लुठ्, पक्वता, दौर्गत्य, रोप, तरसमय, व्रण, नास्य, चतुरन्ता, फेन्य, मीद्वंस्, प्राणनिग्रह, विद्युल्लेखा, स्वयंवरण, विस्मापन, प्रे, शतनीथ, अपरुध्




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