नैःस्नेह्य

नैःस्नेह्य
नैःस्नेह्य /naiḥsnehya/ n. нерасположенность, неприветливость




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परिव्रज्, उत्तुङ्ग, मृडितर्, समता, सहधर्मचर, घु, निस्तल, प्रहरण, विभ्राज्, °विलोपिन्, वधोपाय, रम्यता, त्रिभुवन, मृजावन्त्, °वर्जक, बर्ह्, गल्, अभिगम, °पर्व, वनिन, निगुत्, युवश, शिलवृत्ति, दारक, मुहु, अदायाद, षट्पञ्चाशत्, समनस्, निर्हार, प्रतिवीर, रम्भ, अर्थित्व, अरति, भल, बृहत्कथा, असमस्त, धेय, सक्रुध्, लिट्, परशु, निष्ठुर, घूर्ण, जरितर्, सुतष्ट, सख, संघट्ट, भीलुक, दृ, मनोतर्, प्रह्लादन, विसृष्ट, तृणाद, निःसामर्थ्य, महाश्मन्, अभिनिधा, पुत्रैषणा, सतोबृहन्त्, उद्वेगकर, अवलम्ब्, उदारत्व, निपाद, वर्णना, अनूत्थित, युक्त, अदेव, शोभक, स्वयंदत्त, ईहित, अवाज्, आलोहित, मध्यमजात, यथासुखम्, प्रतिवारण, सनाभि, आघाट, वीतचिन्त, कन्त्व, द्वारस्थ, धिष्ण्य, खिद्, गोह, प्रावृण्मेघ, वप, सद्भाव, वेदिका, अभ्युपपत्ति, नख, त्रिपुराराति, प्रसारित, नीलपिच्छ, इन्द्रचाप, लालय्, हविष्°, विक्रोष्टर्, वक्षी, महाशन, अनुकम्पनीय, क्रमिक, द्रु, विलोभन, सरोरुह, अदूषित, प्रगाढ, व्यायतता, घर्मरश्मि, काव्यकर्तर्, अर्घ्य, उत्था, पौर्वक, पाटलिपुत्र, एवंविद्वंस्, दृष्ट, गुडिका, विद्वेषण, उदयगिरि, आवा, भारसाधिन्, मन्या, चर्पट, त्रिपुरहन्, तमिस्र, वैमात्रेय, वाम्, उपचर्, द्रौपदि, प्रक्लिन्न, सैनापत्य, संसाधय्, निर्बन्ध्, द्रविणोदस्, पवित्रिन्, आचेष्ट्, सखिता, उपछद्, गोचर्मन्, दुर्धी, पद, धनद, बोधि, अतितेजस्, अपूर्व, आलक्ष्, प्रतारक, मृतिमन्, त्यज्, निग्राह्य, अपोदि, इहस्थ, नियतव्रत, वनुस्, मर्म°, बृहद्भानु, कुल्य, न्रधीश, बाणवन्त्, वपुष्या, अधिराज्य, अन्नरस, रज्जु, जलाषभेषज, पारोक्ष्य, वेदफल, दूरपातिन्, सुधामय, साधनता, समाघ्रा, दधृक्, व्यद्वर, अश्रवण, धौरेयक, विप, मुनीन्द्र, अनिमेष, शुद्धता, वर्तमान, तारामय, नृपातर्, पूर्णेन्दुवदन, विद्याधर, अपभ्रष्ट, मधुपर्क, पद्, जीरि, प्रजिन्व्, ताम, पाथस्, तासु, संवर, प्रविक्त, प्रत्यंसम्, विमद्, तावच्छस्, जातकर्मन्, गुरुत्व, रह्, स्वामिसेवा, संप्रछ्, कवोष्ण, नारिकेल, नैश, लस्तक, उत्प्रेक्षा, सांवत्सर, जानुक, श्वशुर्य, कुरु, काक




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