वाञ्छ्

वाञ्छ्
वाञ्छ् /vāñch/ (P. pr. /vāñchati/ —I; pf. /vavāncha/; aor. /avāñchit/ ) хотеть, желать




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प्रमृग्य, अवस्तु, °रम, अनुगर्, ऊर्ज, कटि, समयोचित, लोकोत्तर, लोकोक्ति, लोष्टमय, सचिविद्, कान्तिप्रद, निस्वर, शुक्ली भू, विदान, लोक्य, पूल, खेल्, वरयोषित्, सृणि, मृषावाच्, शास्त्र, चाय्, गोधूम, नितोद, प्राग्गमनवन्त्, लघ्वी, दुर्विनीत, लवणता, अनुकम्पन, धातुघोषा, जरण, सुषह, दिङ्मण्डल, तत्र, बर्हभार, विनिर्गम, हयग्रीव, शून्य, गाध्, अपराग, भीमसेन, स्त्रीसंभोग, वर्षोपल, दौर्मनस्य, संस्कृत, वाकोवाक्य, होम, कुमारिलभट्ट, शिम्, चुल्ली, प्रातःसव, निर्गन्धता, सूचक, असंसृष्ट, संभेद, समस्या, दुर्विलसित, प्रणयिन्, धारापात, कुधी, मुकुट, समधिक, विहर्तर्, अपभाष्, मथुरा, स्वार्जित, प्रतिकोप, पशव्य, लोग, रि, अष्टपञ्चाशत्, सामानाधिकरण्य, अवसेचन, पूर्वकाय, वर्, दुःष्वप्न्य, वसव्य, स्थातर्, शीकर, नयशालिन्, संवनन, सत्पति, ण्यन्त, होमन्, क्षम्य, अकरण, यन्त्रण, तिरोधान, अदृप्यन्त्, अहस्, श्वित्र, वीतशोक, आयुत, आरस्, प्रवृत्ति, द्युक्ष, दुश्चारिन्, श्वञ्च्, विन्यस्, नीलपिच्छ, उपालप्, कुलान्वय, खज, परीक्षक, शवसान, आपत्ति, अवगाह, मास्य, संरब्ध, वरूथ्य, सकलविद्यामय, नश्वरत्व, हिमरुचि, राजतनया, त्रस्तनयन, उपलभ्, आक्रन्दन, दी, संश्रवण, गण्डस्थल, धनदण्ड, ह्रस्वता, संब्, दरी, धाटी, दुर्भाष, निपुणता, स्थविर, 4अप्रतिरूप, अनुकम्प्, संभ्रम, प्रौढि, प्रातर्युक्त, शिरो°, नागनायक, प्रकर्, कुयव, जलाधार, महोदर, प्रतिवचस्, विरस्, भर्तृहरि, सिंही, माध्विक, पश्यति, दीप, अपचरित, समुपेत, नभस, मृत्युकाल, दक्षिणपश्चार्ध, चाटु, निर्जिति, गुणसंपन्न, प्रावादुक, अण्डगत, प्रियकाम्या, ली, विकर्म-क्रिया, कुशलवन्त्, शीलिन्, विस्मरण, ईर, दुःखित, समालिङ्गन, संकीर्तन, प्रश्नोत्तर, खरमयूख, संवत्सम्, वेषान्यत्व, वीक्षा, भूधर, उच्छेष, परित्रातर्, पदान्तर, निगूढ, विक्षुभ्, शीलतस्, पादचारिन्, दृशेन्य, बलसमूह, अभूति, वल्गन, तसर, तोयचर, समधा, मोह, अपनय, शेषा, इरिण, मनुस्मृति, समायम्, तन्वी, दुरारोह, फलयोग, संमुच्, अतिष्ठन्त्, आसिच्, वित्तकाम्या, सारवन्त्, चलाचल, विप्रत्यय, धुर्यासन, स्नु, अक्षी, शून्यमनस्




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