संक्षेपतस्

संक्षेपतस्
संक्षेपतस् /saṅkṣepatas/ adv. кратко, вкратце




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करपत्त्र, परिपाठ, निष्टानक, पञ्चनख, तोक्म, छेलिका, राग, ओज, क्षणदाकर, सपिण्ड, व्युच्छेद, कोसला, अविषयीकरण, सीमन्, लेशतस्, सुनीत, वृत्रहन्, भिक्षुचर्या, स्थितिमन्त्, शक्तिमन्त्, स्नावन्, कृतवीर्य, शिशूल, रणकृत्, दक्षिणाप्रत्यञ्च्, समवलोक्, वर्णमात्र, अनुपम, रसज्ञ, लोहितग्रीव, शाखामय, हितकारक, आयतलोचन, शव्, गुह्, भोजक, संतुल्, दुर्ज्ञान, चित्तभ्रम, नौदण्ड, शमपर, दुःखोपघात, किटि, देवी, अश्वखुर, दरण, बृहच्छोक, नयशास्त्र, छुच्छु, भार्गव, एवमाद्य, यवीयुध्, विपत्ति, मालती, उदीर्य, बहुविध, परिवृत्ति, सस्वर, रजोमेघ, स्वयंमृत, क्षुम्प, मन्दयु, परिभ्रमण, कृतास्त्र, आलेख्य, रूष्, विवर्, आरक्त, देवात्मन्, भण्ड, अनभिज्ञ, दान्त, स्वापन, सापराध, न्यक्कार, कश्मल, देहधारण, प्रत्युदाहर्, अभिसंजात, कौसल्य, जिह्वा, परिमण्डल, सत्कवि, झञ्झा, ग्रास, पङ्क, सुहस्त, संग्रहीतर्, गव्यूति, मित, द्वंद्विन्, निर्विहंग, सिद्ध, संपठ्, वसन्तबन्धु, खण्डधारा, मूर्छन, पूर्वभाव, द्रढिष्ठ, निचेरु, वित्तप, स्वर्ग-स्त्री, नादिन्, सक्रुध्, अनर्घरघव, श्वस्तन, मारमोहित, पृथ्वीगृह, विन्यास, अधोमुख, हला, नवमल्लिका, समीड्, हस्तिस्नान, सव्यसाचिन्, अनुरागिन्, प्याय्, शूकर, मन्त्रविद्, अवरोह, नराधिप, अजातशत्रु, धूर्षाह्, सृण्य, औम, श्रोतर्, शेष, पराश्रय, नामधातु, सरुप, दैतेय, पिण्डरक, वृधसान, गविष्ठ, सूर्यमण्डल, संवर्त, हस्तवाप, मुकुल, स्तनपान, प्रतीक्षण, भौमिक, प्राशितव्य, कुम्भिन्, क्नूय्, निष्पुरुष, वस्, व्यवहर्तर्, प्राणाधिप, अनभिव्यक्त, मरुस्थल, तूष्णींयुद्ध, स्वरूप, शूद्रजन्मन्, मोषण, दैत्यारि, अन्यत्र, भरु, सायन्तन, अपरित्यक्त, जन्या, त्रिभुवन, उपरुध्, सुतनु, विवास, दुर्धर्षता, परिवार, व्रात्य, देवेद्ध, मङ्गिनी, बलप्रद, वृष्ट, नाक्षत्रिक, तुषारकण, पुरीतत्, संवर, प्रेषण, अवस्फूर्ज्, मानद, प्रतिकृत, कुप्य, मौक्य, प्रश्लित, प्रतोली, सामग्र्य, विवचन, प्लाशुक, राष्ट्रिन्, छत्त्रवन्त्, नैर्गुण्य, शतसनि, महाज, एकज, प्रारब्ध, तारल्य, किरीटिन्, नैकट्य, विमृश्य, जलधरमाला, ब्रह्मोद्य, उदन्त, साकं°, सहस्रकर, त्वत्°, ईशा, समनुज्ञा, सापेक्षत्व, आप्तवर्ग




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