स्वक्ष

स्वक्ष
स्वक्ष II /svakṣa/ (/su + akṣa/) bah.
1) пре-красноокий
2) с совершёнными органами чувств




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विलोमन्, मण्डन, सूक्ष्मदर्शिन्, प्रतिगर्, दर्शिन्, सर्वथा, निराबाध, शौटीर, ध्रुवगति, कुन्त, द्विगुण, अपनोद, अविनय, निघर्षण, दशार्ण, बर्हणा, ढौकन, आसञ्जन, पैण्डपातिक, नित्ययुक्त, प्रत्याहार, अनुलभ्, संधारणा, अनिश्चय, इत्यादि, प्रक्षल्, वेदाध्ययन, भ्रुकुटि, यावदर्थ, व्रीहियव, आनील, अनुत्त, निरुषित, दयित, सुजनता, चतुरङ्ग, उत्प्रासन, परिभावुक, वेद्धर्, प्रतिबोधन, स्तोम, सूर्य, प्रेत, शष्कुली, ह्रद्य, पितृतस्, प्रक्रुश्, सूभर्व, देवत्रा, तया, उत्सह्, बलपति, दीनसत्त्व, गार्द्ध्य, रुशती, शब्दवन्त्, क्षत, पृथगालय, परुच्छेप, विशुष्क, , दुधि, शायक, संचय, विकम्पिन्, वेदशास्त्र, भर, नृपीति, महास्वन, मन्त्रसिद्ध, पात्रिन्, विवृति, वाहित, अदभ, चाक्ष्म, समुत्सर्ज्, उत्तरापथ, उत्पतन, विघूर्ण्, संस्थिति, त्यक्त्वा, नामधारक, तेदनि, नर्मन्, समुद्वह्, शास्त्रकृत्, विषु, उन्मथ्, अव्याज, प्रतिपाद्य, अत्युल्लस्, विमा, प्रोत्था, सामुद्र, पित्र्य, कृत्य, वासुकि, भोगनिग्रह, साक्षेप, लाङ्गलिन्, ध्वान्त, विजिति, पुरुषकार, शरदिज, अर्गल, संपादयितर्, अनुलग्न, पिण्डरक, प्रथमतस्, मदनावस्था, मेषिका, परिवर्, ऊधस्, अधिपा, अवपश्, वयस्वन्त्, दुर्जन, प्रपापालिका, कर्ण, नामशेष, देष्ट्री, प्रत्येतव्य, लोकान्तर, सूचिन्, निरौषध, प्रेक्षण, धी, मासशस्, गृध्रकूट, गर्भता, अवसक्त, स्थिरयौवन, तौषार, अतिहा, श्वच्, जरत्कारु, प्रस्तर्, अंसव्यापिन्, नमस्कर्तर्, आभक्त, दुःशासुस्, संवेदन, बरासी, सौन्दर्य, विनोद, दृ, बृहदुक्थ, उषर्बुध्, स्वराजन्, उपारूढ, °संज्ञ, सत्यशवस्, °चूलक, निस्तर्, दिव्यदृश्, मठर, आलेख्य, स्नावन्, उष्णगु, निर्धर्म, अवचय, आगा, प्रकाशिक, अपदान, परिपच्य, केनिप, स्ना, छिद्, नेत्रामय, मर्मभेदिन्, म्लानि, विराट, सुरत, पारत, गूढज, शुद्धभाव, शृत, महापराध, सूरि, अर्घ्य, उन्नद्ध, वृक्षच्छाय, वनस्, अवध्र, कुप्, एक, पृतनाषह्, संतोषण, समानजन्मन्, सुचक्षस्, रसिक, नगौकस्, द्वैध, ब्रह्मभवन, गृहदाह, संशिस्, पुत्रकार्य, आदर, दैवपरायण, अष्टनवति, त्रिषष्, स्वाहा, स्वधर्म, लोकपाल, नद्ध, प्रतिरूप, ऋश्यशृङ्ग
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