निखिलार्थ

निखिलार्थ
निखिलार्थ /nikhilārtha/ (/nikhila + artha/ ) полный, содержащий всё необходимое




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सारस्वत, दुरवाप, भूरिदावन्, सूर्क्ष्य, नाट्य, जीमूत, प्रतिमन्, कण्डु, देवकुल, देशी, गुञ्ज, लब्धर्, देवयु, नटक, व्यवाय, परिरम्भ, वीरण, कुरङ्ग, निर्भीक, मणिक, अधिकर्, शिशुमन्त्, फेन्य, कुन्ताप, आकाश, उपरिष्टात्, संलिख्, पदशस्, प्रतिवाच्, सप, हस्तालिङ्गन, सनित्वन्, निष्पेष, पूर्वपथ, ह्लादुक, अभ्युपाया, आर्षभ, आबुत्त, गिरिव्रज, परिस्था, बृहद्वयस्, शृतत्व, समधा, गुडौदन, अदास, पट, द्रढीयस्, अक्षौहिणीपति, गालन, तनीयंस्, नास्य, लिश्, , जातरूप, अविरुद्ध, व्यक्त, लेलिह, इन्दीवर, भागापहारिन्, वृद्धसेविन्, स्थवीयंस्, एकार, बहुवचन, दीर्घतीक्ष्णमुख, कुलपांसनी, अविशङ्क, क्रीतक, अतसि, द्विजानि, स्वरभूत, विघूर्ण्, पञ्चत्रिंशत्, प्राणनिग्रह, निधातव्य, आस्कन्द, पुनर्दारक्रिया, प्रथस्, ब्रह्मर्षि, संबन्ध्, प्रावृष्, शिम्, प्रतिकार्य, दोषिन्, मुण्ड, असुर्य, क्षान्तमन्त्, °लाव, धनंजय, चक्रवाल, नौतार्य, प्रतिवेश, शयन, वचनावक्षेप, विमुक्तकण्ठम्, निष्क्रण, विलय, अष्टादशन्, समिन्धन, मुक्ति, न्यञ्च्, नाभिलक्षित, समान्त, रासन, वसुर, स्पन्द्, जल्पन, टाल, प्रणीत, नकुलेष्टा, लोकिन्, अमार्जित, बहुवीर्य, विहाय, प्रलय, प्रतिदण्ड, हस्तस्थ, जर्भरि, आन्तर, तीव्रता, आपीन, समुपचित, दन्तालि, लोचनपथ, संगोपन, दन्त्य, समावन्त्, राजतरङ्गिणी, अग्रेपा, विश्वह, अमराचार्य, त्रिपिटक, विवक्षु, पुलिन, प्राग्वात, भद्रकारक, महामनस्, अदृपित, विरूपाक्ष, प्रीतियुज्, अपास्, परिजात, एता, लोहितग्रीव, तिर्यग्ग, परिहरण, नैर्घृण्य, क्षोभण, अर्द्, किरीट, भूकम्प, बाहुवीर्य, दोषन्, आलि, लोहित, सैन्धवखिल्य, निश्वास, दुर्, वारवधु, निर्विद्य, सुदक्षिण, दत्, द्वैविध्य, वेदना, प्रकाम, अघृण, विच्यु, अतिरुच्, कङ्केल्ली, मी, पल्वल, विधेय, पुरस्तात्त्न, निरास, निर्भर, द्विट्सेविन्, सप्तसप्तति, त्रयोदश, पूर्वापरीभाव, इन्द्रजित्, नील, धर्णसि, निषादिन्, प्रतिधर्तर्, मृतिमन्, देवकिल्बिष, , रम्भ्, धि, मयो°, आस्वादन, कृत्तिका, कौल, धारणा, ह+स्यता, धर्त्र, दात्यूह, वसन्तोत्सव, गुरुतल्प, लुब्ध, ध्यातर्, साव, कृष्णनयन, धर्मन्, अङ्क्, शिष्, त्रिपुर, तितिक्ष्




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