अनुकम्प्

अनुकम्प्
अनुकम्प् /anukamp/ (формы см. कम्प् I) соболезновать кому-л. (Acc., Loc. )




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व्रतस्थ, समासोक्त, वेश, निरि, चूतशर, मानससंताप, वाकोवाक्य, पटिष्ठ, निष्पत्ति, रुशती, क्षप्, सुशमि, तुरण्य, उन्नम्, प्रसह्, देवतासहायिन्, पुराकल्प, नाटिक, निस्वपय्, वह्, पक्वता, कपल, तन्द्रा, विकास, सम, रसज्ञ, शाब्द, कौषीतक्युपनिषद्, चतुर्थकालिक, भगवन्त्, सूक्ष्मता, ब्रह्मचर्याश्रम, भूमिपरिमाण, परिध्वस्त, कदर्थन, मुग्धधी, अनिमेष, धूम्या, गिर्, जम्भलिका, वज्रसार, मदिका, दुह्, कृपीट, विभिद्, दरिद्रत्व, इन्द्रज्येष्ट, कन्दर, सद्रत्न, न्यग्भावन, दण्डविकल्प, उद्यम्, प्रतिकङ्चुक, कनीनक, दुर्निग्रह, प्रणुद्, दीर्घता, एकाह, मध्यता, सागरगामिन्, मान्द्य, अवन्ध्य, दृश्, यावदन्तम्, पङ्क्तिक्रम, उपोद्घात, गर्त, ब्रह्माण्डपुराण, पिपील, सूचिपत्त्र, अती, घूक, लेश, सृभ्, तण्डुलकण, धारणक, धाव्, शीघ्रवाहिन्, पूजागृह, उत्पाद, सनक, पात्रय, बट्, सुदुस्तर, श्रुष्टि, महागल, प्रस्ना, कूज, आसेवा, वियत्, मृज्, वरण, विभूषित, मातर्, सिद्धलक्ष, द्रुघण, ल्यप्, कटकरण, दशाक्षर, प्रांशु, प्रभूत, आदिमूल, निर्ग्रन्थन, संभोज, पापमति, सूर्यवंश, विजिति, विक्रीड, निध्या, दर्, तादृश, सार्थपाल, निःक्षत्र, निशरण, सुक्षेत्र, आविद्, मनुष्यत्रा, मरकत, निम्न, वृन्दीयंस्, प्रासङ्गिक, न्यङ्ग, प्रोष्ठ, चमस, वाताशिन्, ऋते, मधुव्रत, अवगुह्, अस्र, प्रसञ्ज्, आर्यागीति, रासभ, भानु, त्रिदशारि, हरिद्रा, श्लथ्, शाककाल, त्रिशिरस्, पौरुषेय, प्रव्यक्ति, अमण्डित, धौम्य, मृदुक, मृतपुरुषदेह, वास, स्युड्, माणिक्य, स्नेहमय, नवपद्, क्रियाप्रबन्ध, प्रतिदण्ड, वर्तिस्, अकुशल, दृष्टिमन्त्, मा, मेधसाति, वाङ्मनस्, प्रदीप, सार, पुरुधा, नागिन्, कौटुम्बिक, माध्यस्थ, नागशत, प्रतिलुभ्, राष्ट्रभृत्, परिवद्, वणिज्, मल्लिनाथ, स्वसृत्व, ध्रञ्ज्, विप्रकर्, स्वन, दुहितामातर्, अनावृत, सूक्ष्मत्व, प्लेङ्ख, प्रत्याचक्ष्, धनोपक्षय, पलायन, कण्ठ्, तैत्तिर, नाम्य, उष्णीष, आपस्, श्रीमनस्, सज्य, देशय्, तति, सुकृत, नैशित्य, बाहुयुद्ध, मन्त्रसंहिता, अविनाशिन्, अयास्य, तूर्ण, अध्रिगु, मन्दप्रज्ञ, नवविंश, समर्य, भीमयु, प्रीतियुज्, लिह्, विद्यानुपालिन्, अणिमन्, मञ्जर, दक्षिणोत्तर




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