क्षिप्

क्षिप्
क्षिप् II /kṣip/ f. палец




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टंकृत, विधिवत्, कृतक्रिय, संतृप्ति, मध्वाशिन्, राष्ट्रि, विशस्तर्, प्राप्ति, हेमकन्दल, शीघ्रत्व, पाश, परसेवा, दुस्, मज्जा, चन्द्रमस्, आर्यवृत्त, अपाञे, सुसंभ्रान्त, नीवि, सविलक्षम्, अमित्रता, व्यतिरिच्, अधम, कर्त, श्याव, कूज्, जीवनक, संलुड्, दूरसंस्थ, डिम्ब, एकान्त, भृथ, आगा, विज्ञात, शकार, पिनाक, उपचार, गुन्द्रा, परिपाकतस्, वन्ध्य, उत्कर्ष, पिण्डयज्ञ, अङ्गविकार, अभिवन्, परिचित, उष्णासह, क्षुप, स्तोतर्, ईषत्, प्रधानता, नीरन्ध्रता, दिह्, युधिष्ठिर, भर्, छन्दोमञ्जरि, उद्भिद्य, निवरण, प्रमि, नदनदीभर्तर्, अवस्कन्द, मानुषी, दिशा, कन्धर, कण्टकशोधन, अतितेजस्, ददितर्, वप, सविस्तर, सावरण, धी, सृज्, संपारण, क्षत, सलोमन्, अगाग्र, अभिसह्, काष्ठमय, संसर्जन, सालंकार, जातिसंपन्न, यथाश्रुति, वनप, मलवन्त्, सुतीक्ष्ण, दिव्यसंकाश, नौजीविक, परिपणित, दर्पणिक, वार्द्धुष्य, विसंवद्, घूर्णना, कृश, संवर, नैमिष, दिव्यचक्षुस्, मरुस्थल, भिषज्य, सुदुर्जय, परिस्फुर्, गृहि, ससुहृद्, समुदय, लाभालाभ, अल्पधी, सप्रतिबन्ध, भगीरथ, निदाघकर, स्कन्दपुराण, ब्रह्मचारिन्, मुखराग, कुट्टिनी, घनान्त, सान्द्र, सुबाहु, नृभर्तर्, शाशि, प्रतिपालिन्, द्विजन्मन्, दशम, क्लेश, अवस्तु, षष्, निराग, संरुष्, नारक, प्रविद्, वस्तु, पङ्गुक, कुठारिक, संचारिन्, नम्, छायावन्त्, विज्ञानिन्, अकृतपूर्व, पुष्पिन्, दुर्विदग्ध, प्रतिनायक, भाक्त, उपस्थित, विवीत, काठक, संलीन, मूलक, हृल्लास, सपद्मक, ऐषीक, वाल्लभ्य, संरुच्, रोमन्, विलोक्, घूर्ण, वातायन, स्तब्धीभाव, दिगम्बरी, ग्रहणीय, पेट, वास्त्व, प्रतिदीवन्, शम, कान्त, जलधरमाला, प्रमदाजन, जघन्यज, विदेशस्थ, , गृध्यिन्, पृषत, दुःखत, मङ्गलवचस्, वयित्री, भर्तृव्रत, धूलिध्वज, संशितव्रत, °पथ, अज्मन्, मधुपा, त्रातर्, नेजन, मणि, साति, मृत्°, रट्, सत्त्र, धुरा, गोहत्या, सरङ्ग, उद्यमभृत्, पूर्णाञ्जलि, चित्रकर, अन्तर, मुष्टि, °निर्वापक, कृत्नु, निवात, विशेषण, सुलभावकाश, आप्ति, तूर्णाश, परिजात, समष्टिता, मन्दचेतस्, उपक्षेपण, परस्यान, वनलता, रविबिम्ब, घृत्य, संमर्ज्
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