महीपाल

महीपाल
महीपाल /mahī-pāla/ m. хранитель земли, царь




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सर्वगत, ब्रह्मजाया, उच्चारण, पार्वती, अन्तम, पङ्किन्, अर्धसीरिन्, पैशल्य, आयूज्, विदुस्, वरूथ्य, द्रुह्वन्, रिङ्खण, औष्ण्य, अभिसंस्वर्, भूमिजात, चन्दनोदक, माक्षीक, दुःशील, पुराण, सामर्थ्य, सत्त्व, जवीयंस्, तृषा, समशस्, वामतस्, झरा, हर्षुमन्त्, तत्सम, अकस्मात्, क्रोधिन्, नित्यशय, निर्मथ्, रह्, निर्भीत, नृभर्तर्, पर्यच्, हस्ताहस्ति, विसदृश, अभिवह्, क्रन्द्य, लङ्घन, शीतमय, ऋघावन्त्, विभ्राज्, प्रज्ञा, संहर्तर्, दारुण, उद्वर्ष्, अत्वर, पुष्पकाल, षड्विंश, निमीलन, सान्तर्दीप, सोमशित, विसर्पिन्, सुतेजित, विमर्द्, सानुमन्त्, निर्भास, सुकण्ठ, तन्त्र, निर्दाह, नावोपजीवन, निर्द्रव्य, सद, कुण्डल, ऊर्णायु, स्वर्गति, नव्य, एकक, अनामय, प्रतिक्षेप, गृहार्थ, स्वनय्, एकार, विकम्प्, कर्णिका, प्रवचनीय, मृदुल, विनम्र, तरुणी, सह्, समान्त, वीचि, परिज्ञानिन्, प्रमुच्, वादिन्, बैजिक, शिबि, परीक्षा, प्रसविन्, धाम, खरांशु, द्रव, सुयज्ञ, रघुष्यद्, एनान्, अमराधिप, प्रवर्धिका, अभिविख्य, प्रतिपण्य, प्रसर्ज्, प्ररेचन, विमथ्, वचनीय, ककार, सानुनय, भण्ड, समाभर्, रोगघ्न, संप्रयोग, प्रतिराजन्, कीटग्+न, अनुकम्पा, वी, आवरण, सुधन, अर्धपीत, शुक-सप्तति, मृगेन्द्रता, पराभूति, संवल्, उपलिप्, वर्णधर्म, छादन, अपार्थ, औष्ठ, नस्य, राजद्वार, सोढ, लेखा, क्ष्माय्, सनाभि, सितेतर, चमर, काशिक, द्रोग्धर्, मेधसाति, त्रयोविंशति, उदर्क, षडह, जलाष, नृम्ण, अपहार, सीक्, पूजा, ऊर्जस्विन्, आतम्, विवर्त्, दीन, प्रतिव्यूह, गद, ससाध्वस, स्निग्ध, पण, उच्चय, नीलीवर्ण, स्वनुगुप्त, अशस्, पिष्टातक, संवीत, अमति, औग्र्य, सुनयन, मद्गु, शाक्यमुनि, उपान्तिक, प्रतिष्ठान, नहुष, धृष्णु, सत्क्रिया, परिहर्, शीत, प्रात्यन्तिक, प्रच्छादन, लोककृत्, अमहीयमान, सुगु, नार, मध्यग, समुत्पत्ति, भामित, भरण, निषाद, एकान्तभीरु, दृग्गोचर, दंसन, सर्वभूतात्मन्, विष्टम्थिन्, श्लक्ष्ण, धिक्, विटङ्क, प्रपाठ, सुरसुन्दरी, वशीकर, निष्प्रतिभ, बालभाव, उदूह्, अम्भोज, अभियुध्, अन्वेषणा, अवयव, सुवदना, परु, सांप्रत, रथयुद्ध
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