लोकधातर्

लोकधातर्
लोकधातर् /loka-dhātar/ m. nom. pr. Зиждитель, Творец мира — эпитет Шивы; см. शिव 2 1)




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सोम्य, धौत, मूषक, दैवगति, समाश्रि, दुष्टचारिन्, शैलशृङ्ग, अचर, विनेत्र, संस्रव, भिक्षुचर्या, कुटीर, तेजस्विन्, क्रन्दनध्वनि, गुरुतर, दिक्छब्द, गतासु, अलंकारशास्त्र, नु, सम्यक्संकल्प, सर्वजन, प्रदर्शन, क्षैत्र, दिवसकर, महानसी, वृत्रहन्, श्वित्र, स्वर्य, शची, अपवाद, अभ्रित, राजवल्लभ, उल्लिख्, होत्रक, पुषय्, शेलु, कीनार, पापहृदय, स्वयंदत्त, पयोदुह्, पायक, इतरथा, संरम्भ, विलिप्, राजभट, भूकम्प, द्रवितर्, गर्, धूमकेतु, निमीलिन्, महाग्राम, आर, दुष्टात्मन्, रु, गजसाह्वय, चारुहासिन्, विघ्नजित्, , वावातर्, वृकी, गर्भकाल, त्रासनीय, निर्वेद, गर्हण, हयेष्ट, गेष्ण, धूर्तत्व, ठालिनी, ओजिष्ठ, गोषाति, गत, जघन्य, अवबोध, संनिरोध, शैथ्य, अयम्, शमिन्, सव, प्रतियुज्, घ्राणा, छद्मन्, नभःसद्, सुपुष्प, आख्यान, विदंश्, अनुसंव्रज्, रुधिर, जिह्म, फाणय्, वर्मन्, विग्रहवन्त्, वसुजित्, प्रक्लिन्न, रूषण, हसन, पृष्ट, शान्, मृगण्यु, अनुकूल, चम्पका, प्रियकृत्, वारमुख्य, जाह्नवी, जुगुप्सित, पर्यच्, °प्रदर्शिन्, सद्योजात, आसेव्, संशप्तक, एवंरूप, सारल्य, अकृपण, दिव्यसंकाश, आततायिन्, प्रशंसोपमा, प्रत्याधान, चलाचल, निर्वाह्य, नूपुरिन्, स्मरदीपन, संवलित, राजराज, प्रायशस्, तोयपात, श्वोवसिय, खेचर, प्रकेत, घर्मरश्मि, उमा, श्मश्रुकर्मन्, वेदी, उद्गा, शून्यमनस्, संधर्, देवाधिप, शुद्धि, प्रातिवेशिक, ससितोत्पलमालिन्, आस्तर्, नटन, हू, निवृत्ति, बीज, सयत्न, वातात्मज, बन्धु, च्युति, दशदिश्, धर्मात्मन्, उख, शूरसेन, द्रोण्य, अलर्क, प्लवंग, अनुसर्, एकशत, श्रुतवन्त्, विसारिन्, क्षुरकर्मन्, कूलंकषा, संमोह, तितिक्षा, सतस्°, प्रहर्ष्, पर्वास्फोट, विशिशसिषु, संचय, अधैर्य, शब्दपति, प्रतीमान, रसित, वैकार्य, कति, त्रिषत्य, जीर, रुद्रवन्त्, उद्वाह, पृथुता, प्रत्यक्ष, लुञ्च्, संप्रदान, विश्वतुर्, वधना, डिम, इव, प्रार्थ, दानपर, आत्मगति, तुषारगिरि, अतिलोभ, अनेकविध, संप्रस्था, संवर्तक, पर्युपासन, क्षेपणिक, परियज्, धन, तितिक्ष्, संपच्, अचित्ति, शोभिन्, प्रेमन्, सधर्म, स्रव, सत्यवादिता, अक्षमाला, असुररक्षस




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