संकर्

संकर्
संकर् /saṅkar/ (формы см. कर् III )
1) наполнять
2) снабжать
3) смешивать




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मिन्दा, निष्कल, °पत्, निर्विधित्स, औत्सुक्य, सददि, विदारिन्, गगण, श्यामिका, नरेश, काय, साष्टाङ्ग, रोमहर्ष, स्कम्भ, सनित्वन्, प्राग्दक्षिण, दानशील, हनन, दुर्गसिंही, स्वार्जित, बिस, उत्क्षेपण, महामात्र, पक्ति, इभ, अङ्गारक, विश्रुत, तिरस्करण, स्तम्भ, वाच्य, चुण्टी, मुखचन्द्र, वसति, षड्विंशब्रह्मण, परिपवन, हू, एकवसन, सुप्रतिष्ठ, काष्ठ, ध्वंसिन्, साह, मनुष्यजात, , अपमृग, अतिसाहस, प्रस्तावना, कृत्याकृत्, मतिहीन, शारीर, निर्वृति, विरोपण, कवष, उन्मज्ज्, राज्°, तर्ष्यावन्त्, चतिन्, प्राणहीन, देवहू, महाशन, पूर्ववत्, द्विरूप, महानिश्, प्ररुद्, देववधू, कौटुम्बिक, विश्वभेषज, मर्श्, आख्यान, कौमार, परोपकार, सविस्मय, अपप्रे, निरपाय, हरिणहृदय, मद्गु, दग्ध, परिवह, नीलकण्ठ, उपज्ञा, कल्माष, हक्क, शतधन्य, केनेषितोपनिषद्, शाम्ब, महारव, लालस, ओजीयंस्, ह्रेष्, स्रंसन, एकरस, बन्धकी, सहाध्यायिन्, प्रियबन्धु, अनुकाङ्क्ष्, एना, निर्, पार्थिव, यक्ष्म, स्थूल, प्रतिरुच्, आत्मवध्या, सुनिद्र, संशय, मघ, प्रशमन, महेन्द्रमन्दिर, अवाज्, शतमान, विश्वास, तिरोधान, मयूरपत्त्रिन्, अभियोक्तर्, कुम्भक, पिष्टातक, उपरमण, विनिपत्, अवृक, महौजस्, स्वेष्ट, गाढ, यथावत्, आसर्ज्, चर्चा, सनामन्, दोषाक्षर, प्रली, दैवविद्, प्रत्यभिप्रस्था, अवभञ्ज्, तथ्य, असुर्य, मिथु, स्वामिता, अपनयन, अनल, नृतु, दशा, महाकाव्य, परिमिताहार, फली कर्, फाणय्, सुदारुण, दन्तमूलीय, द्विरुक्त, मेदिनी, एकपार्थिव, कूट, गु, तैमिर्य, क्षुमन्त्, शण्ड, शिथिलसमाधि, धार्ष्ठ्य, उच्छ्वस्, कर्त, अनवच्छेद, प्रसह्, बृहद्रथ, वारितरंग, अमूल्य, निरीक्षा, निष्कर्ष, व्योमसद्, षकार, मण्डितर्, जेष्ठवृत्ति, कृष्णा, जाबालि, परिपतन, भयकृत्, डी, देशाटन, उरग, भूमिदेव, असुतृप्, क्षेत्रिय, हान, चातक, विकत्थन, उपमेय, यथापूर्व, कङ्केल्ली, राष्ट्रिन्, शतसेय, भङ्गिमन्त्, सितकमल, आदा, नदीतट, उद्यम्, संशुष्क, भोक्तुकाम, इज्य, नष्टि, वर्षारात्रि, प्रतिपूर्ण, अरक्षित, भञ्जन, लङ्जा, ब्रह्मस्तेय, दासजीवन, पथिभिस्, मृग, दार, रुप्, अनुवीक्ष्, वेधक, नागबल




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