भुवनत्रय

भुवनत्रय
भुवनत्रय /bhuvana-traya/ n. три мира (небо, земля и подземный мир)




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दिनकर, एकविंशतितम, दैवगति, वन्दितर्, अन्तम, अप्रतिबुद्ध, द्रा, कार्यहन्तर्, भ्रूकुटीबन्ध, चर्षणिप्रा, प्रीतिवचस्, स्नानवेशाला, युयुत्सु, पुण्यजन, प्रशिथिल, समश्नुव, भृङ्ग, देवीभवन, माध्विक, स्थेमन्, संरुध्, निकृतिन्, अन्धक, सर्, विधूसर, विप्रेन्द्र, तस्मै, संवत्सरीण, ऐरावत, दुर्गम, संनम्, लघिष्ठ, तुषाररश्मि, °वन्द, बिम्बित, परिदेविन्, दधृक्, लक्ष, तुला, भुवन, अपर, रौद्र, द्यावाक्षामा, अवनिज्, अरण्यानी, अभिकाङ्क्षा, वासुदेव, उपहारपाणि, शोचि, दुः°, एषिन्, एला, वसन्तोत्सव, अधिपति, चिताधूम, मनीषिन्, तक्ष, औत्पत्तिक, शतपर्वन, संविधा, पद्मवन्त्, नवाक्षर, समवेक्षण, पञ्चांश, वृद्धोक्ष, शास, आस्, क्षुद्रशत्रु, नगराधिपति, उद्धर्, आलु, सधर्म, वासव, सनातन, निष्कलत्व, बहुपत्नीता, सप्रजस्, शाम्बरिक, सार्द्र, घाटय्, पथे, अयोग, हेमगर्भ, भोगायतन, अभिसंजात, परकृत्य, गुणान्तराधान, समस्, अनुगुण, समचित्तत्व, कन्, अनिर्ह्रादिन्, अरित्र, युवयोः, जैह्म्य, प्रतिसंधि, वर्जित, प्रियप्रश्न, चिर्भट, परिक्षाण, नृहरि, व्यञ्जक, सुग, हेतु, वरतनु, यवन, विह्वल्, समसर्वगुण, चक्रवर्तिन्, निर्वंश, द्व्यणुक, संमील्, कार्यवृत्तान्त, जठर, विलासिन्, विनिर्मुच्, विशी, समुपगम्, कृतोपकार, ख्यात, समीपतस्, सहस्वन्त्, अग्निहोत्र, मातरिश्वन्, वात, लुब्धक, स्वयमर्जित, इस्कृति, पेत्व, तप्यतु, संदुह्, शिच्, सात्मत्व, स्तेयिन्, बुभुक्षु, प्रेक्षण, कामशास्त्र, रोपयितर्, सुक्षेत्र, कुथित, याप्य, उत्सेध, कालकर्मन्, उपरच्, नगनन्दिनी, गोदोहन, अवश्याय, अनिष्ट, अल्फियस्, विसर्पिन्, सहाध्यायिन्, बर्हिषद, विशुष्, धान्यार्घ, पञ्चशीर्ष, ज्ञानिन्, निर्गमन, आत्मसंतान, व्लेष्क, कार्यदर्शिन्, अनुवह्, निरपेक्ष, परितस्, निदा, शु, श्रद्धादेव, पूर्वत्व, अप°, उपहर्, अवबुध्, तुष्टिमन्त्, आभिद्, चमत्करण, पर्यवधारण, श्यामी कर्, पिच्छल, शुच्, संब्रू, अदत्ता, शृङ्गाटक, सु, युवती, श्वपुच्छ, निरपाय, उपकार, हिरण्मय, त्रि-कर्मन्, , प्रायिक, युष्मान्, रुचिष्य, वेट्, नदनदीपति, अवक्रय, भूतधारिणी, चतुःशत, हर्षण, चित्रफलक, जायात्व, निर्भर्त्सन, शुभंकर, अस्थिर, धरणीश्वर, वर्णवृत्त, देवमुनि, गर्ध्, सस्यक्षेत्र




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