भावसखनित

भावसखनित
भावसखनित /bhāva-sakhanita/ n. грех, совершённый в мыслях




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आज्ञप्ति, तन्द्र, स्नानगृह, टंकृत, झरा, निवात, किञ्जल्क, हस्तिपाल, दुरात्मवन्त्, निवास, सितोत्पल, दिव्याकृति, प्रत्याचक्ष्, पैनाक, वेद्धर्, लक्षक, पदपङ्क्ति, विमुच्, च्यवन, निरपाय, यथावत्, मेध्यता, राज्यसुख, आवा, सप्रहासम्, मिथुया, अवत, पूर्वत्व, निर्मज्ज, यज्ञकृत्, संरक्ष, ललामन्, अभ्यञ्ज्, मुर्च्छ्, गुणीभूत, दुर्निवार्य, लिप्ता, पाणि, उपक्षि, अकुल, वर्षन्त्, हय्, लिश्, शिमीवन्त्, अक्षपटल, शिवभक्ति, पुरीष, एकाङ्ग, ऊर्णामय, जू, लिपिकर, सायक, मुग्धेक्षण, जानपद, प्रतिहस्त, सुकृतकृत्, मोक्षक, दुर्गसेन, अहत, अनुदर्श्, वाश, रणशिरस्, स्वहस्त, बहुधा, खड्गिन्, डोम्ब, कार्मण, क्षपण, प्रतियोधिन्, कुटुम्ब, प्रत्युद्गमन, दानशील, तारित, शुद्धसत्त्व, कटक्रिया, विविद्, दृषद्, साविनी, मेखलावन्त्, जीराश्व, विवर्त, घर्ष्, आप्तवर्ग, विभक्ति, महानिद्र, धान्यांश, दुष्कर, परतस्, फण्, संक्षय, दासत्व, जीवधानी, पुष्कलावत, निर्दयत्व, साढ, शकुनि, लिङ्गिन्, भाम, निःश्रीक, वैवाहिक, दिविज, तुरण्य, °मुखीय, लिप्, प्रतिकर्तर्, नियमस्थिति, परिपाण, मनोमय, संवर्णन, समाम्नाय, शर्ब्, कुङ्कुम, विस्फूर्ज्, द्रवितर्, स्मेर, शिरसिरुह, माम्, वनोपप्लव, ग्रथना, अमावासी, शक्यत्व, नवाशीति, दुर्गपाल, नालिकेल, जायु, जन्म-क्षेत्र, अनन्तता, निरहंकार, ऐन्द्र, विद्वज्जन, पौरलोक, इत्यर्थम्, बलज, कर्कोटक, तमस्विनी, उद्दण्ड, पीत, परिणाहवन्त्, समवेक्ष्, सृणि, संवाश्, अलस, प्रपान, प्रतिनमस्कार, द्विसहस्र, मान, द्विःसम, सुप्रिय, पूतिनासिक, वेदविद्वस्, सैन्धवखिल्य, समाहित, माद्री, मांसादिन्, सोमयाज्ञिन्, समुद्रगा, वरीतर्, देवतासहायिन्, अरुण, सांयुगीन, पौरजानपद, रूढ, भर्तृप्रिय, परिच्यु, गायकी, विभूति, प्रलिप्, रक्षोहत्य, प्रक्लिद्, रिक्तपाणि, देवात्मन्, रण्वित, अन्तराय, गृहस्थता, अव्यापार, अवभञ्ज्, घृणा, रवण, आजात, एम, मस्तु, धर्मसंज्ञा, प्रतिवन्द्, मैत्र, मुरारि, जर, एवंतर्किन्, धर्मकाम, यव, ताम्राक्ष, विरोचन, अतिशी, कलङ्क, तकु, त्रयोविंश, रक्ताशोक, मनुस्मृति, सापत्न, दुराचर, अदुष्ट, संग, जलरुह्, सौरिक, अचिरप्रभास्, , पाञ्चाल, प्रतिपण्य




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